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अब ऑनलाइन क्राइम से निपटेगी दिल्ली पुलिस की ये स्पेशल यूनिट, मिली 'सुपर पावर'

दिल्ली पुलिस महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के त्वरित समाधान के लिए SPUWAC यूनिट को सशक्त बना रही है, जो अब FIR दर्ज करने से लेकर जांच तक का पूरा काम स्वतंत्र रूप से करेगी।

Sat, 31 Jan 2026 11:02 AMAnubhav Shakya नई दिल्ली, हिंदुस्तान टाइम्स
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अब ऑनलाइन क्राइम से निपटेगी दिल्ली पुलिस की ये स्पेशल यूनिट, मिली 'सुपर पावर'

दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन अपराधों को देखते हुए पुलिस एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब अश्लील सामग्री, मॉर्फिंग या ऑनलाइन छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं को साधारण साइबर थानों के चक्कर नहीं काटने होंगे। दिल्ली पुलिस अपनी 'स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन' (SPUWAC) को डिजिटल दुनिया के अपराधियों से निपटने के लिए पूरी तरह पावरफुल बनाने की तैयारी में है।

ठगी की भीड़ में दब जाते थे संगीन मामले

अभी तक महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्ट भी उन्हीं 15 साइबर थानों में होती है, जहां ठगी और धोखाधड़ी के मामले आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर फ्रॉड के मामलों की बाढ़ इतनी ज्यादा है कि बच्चों और महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मामले पुलिस का ध्यान नहीं खींच पाते। एक अधिकारी ने बताया कि वित्तीय धोखाधड़ी के हजारों मामलों के बीच यौन साइबर अपराधों को वह प्राथमिकता नहीं मिल पा रही थी, जिसकी उन्हें जरूरत है।

SPUWAC को मिलेगी 'सुपर पावर'

प्रस्ताव के मुताबिक, SPUWAC अब ऑनलाइन यौन अपराधों का पूरा जिम्मा संभालेगी। ये यूनिट अभी तक मुख्य रूप से दहेज और घरेलू हिंसा के मामले देखती थी। यह यूनिट अब सिर्फ शिकायत नहीं लेगी, बल्कि FIR दर्ज करने से लेकर जांच और कोर्ट में केस लड़ने तक का पूरा काम खुद करेगी। इसका मकसद यह है कि पीड़ित को अलग-अलग यूनिट्स के बीच न भटकना पड़े और उन्हें तुरंत न्याय मिले।

Delhi Police

डरा रहे हैं ऑनलाइन क्राइम के आंकड़े

आंकड़े बताते हैं कि बदलाव क्यों जरूरी है। अगस्त 2023 से SPUWAC को अमेरिकी संस्था NCMEC से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 26,000 से ज्यादा साइबर टिपलाइन रिपोर्ट्स मिली हैं। लेकिन मौजूदा सिस्टम की पेचीदगियों के कारण इनमें से केवल 203 मामलों में ही FIR दर्ज हो पाई। हैरानी की बात है कि 2024 में जहां चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी 136 FIR दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 63 रह गया, जो जांच में ढिलाई की ओर इशारा करता है।

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हर जिले में बनेगा स्पेशल 'सुरक्षा चक्र'

सिर्फ हेडक्वार्टर ही नहीं, दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों में इस यूनिट का एक डेडिकेटेड डिपार्टमेंट बनाने का भी प्रस्ताव है। इन थानों में विशेष जांचकर्ता, साइबर फॉरेंसिक सपोर्ट और ट्रेंड स्टाफ होगा, जो ऑनलाइन स्टॉकिंग और डिजिटल अब्यूज जैसे मामलों को संवेदनशीलता से सुलझाएगा।

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