पुलिसवालों को ब्लैकमेल करने वाले गैंग का पर्दाफाश, वर्दी उतरवाने की धमकी देकर करते थे वसूली
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मकोका के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सरगना के गुर्गों सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।

आमतौर पर ट्रैफिक पुलिस लोगों के चालान काटती है, लेकिन दिल्ली में एक ऐसा गैंग पकड़ा गया है जो ट्रैफिक पुलिसवालों का ही 'चालान' काट रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल वसूली रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था।
पुलिस को फंसाने का 'मास्टरप्लान'
यह गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था। गैंग के सदस्य जानबूझकर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को छोटी-मोटी रिश्वत लेने के लिए उकसाते थे। जैसे ही कोई पुलिसकर्मी राजी होता, ये खुफिया तरीके से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लेते थे। इसके बाद वीडियो से छेड़छाड़ की जाती थी। फिर पुलिसवालों को सस्पेंड कराने, विजिलेंस जांच बिठाने या झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
दो 'की-प्लेयर्स' गिरफ्तार, रंगे हाथों पकड़ा गया एक
क्राइम ब्रांच के एंटी-रोबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) ने दो अलग-अलग ऑपरेशन में इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने आमिर चौधरी उर्फ सिकंदर के आरोपी को रंगे हाथों दबोचा जब वह एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से वसूली के पैसे ले रहा था। यह गैंग के सरगना जीशान अली का खास गुर्गा है। वहीं संजय गुप्ता नाम के दूसरे आरोपी को बीते 20 जनवरी को गिरफ्तार किया गया। यह कुख्यात सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा का करीबी है, जिसे वीडियो बनाकर पुलिस को ब्लैकमेल करने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी।
क्या है फर्जी स्टिकर का राज?
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह सिंडिकेट कमर्शियल गाड़ियों को चालान से बचाने के लिए एक फर्जी सिस्टम चला रहा था। गाड़ियों पर एक फर्जी '03 मार्च' का स्टिकर लगाया जाता था, ताकि उन्हें पुलिस रोक न सके। जब व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच हुई, तो इस पूरे संगठित अपराध का कच्चा-चिट्ठा खुल गया।
2015 से एक्टिव था मास्टरमाइंड
इस खेल का एक मास्टरमाइंड राजकुमार उर्फ राजू मीणा है, जो 2015 से यह काम कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों पर मकोका (MCOCA) जैसी सख्त धाराएं लगाई हैं। अब तक इस मामले में किंगपिन समेत 7 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। ब्लैकमेलिंग के इस धंधे ने पुलिस विभाग की नाक में दम कर रखा था, लेकिन अब क्राइम ब्रांच ने इस सिंडिकेट के अहम मोहरों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।




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