दिल्ली पुलिस का बड़ा ऐक्शन, बड़े साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश; 5 गुर्गे गिरफ्तार
दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी जिले के साइबर पुलिस ने एक अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले इस गिरोह के पांच गुर्गों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया है।

दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी जिले के साइबर पुलिस ने एक अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले इस गिरोह के पांच गुर्गों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपी दुबई में बैठे मास्टरमाइंड को 'म्यूल बैंक खाते' मुहैया कराते थे। गिरोह द्वारा दिल्ली निवासी एक युवक से 12 लाख रुपये की गई थी। इसी की जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ है।
डीसीपी अमित गोयल के अनुसार, पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए 35 बैंक खातों की विस्तृत जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 18 अन्य शिकायतों से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। पुलिस अब दुबई बैठे मास्टरमाइंड और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
कैसे की ठगी?
अरुणाचल प्रदेश के मूल निवासी और दिल्ली में रह रहे एन राय ने एनसीआरपी पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 'नेक्स्ट बिलियन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड' नामक एक फर्जी कंपनी की ओर से परिणीति जैन और उसके साथियों ने उनसे संपर्क किया। भारी मुनाफे का झांसा देकर सात जुलाई, 2025 को उनका ओटीसी खाता खुलवाया गया और उनसे कुल 12.23 लाख का निवेश करवाया गया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। टीम ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों और रकम की लेनदेन की गहन जांच की। सुराग मिलने पर पुलिस टीम ने महाराष्ट्र के श्रीरामपुर में छापेमारी कर मुख्य आरोपी 25 वर्षीय श्रीधर दिलीप इंगले को दबोच लिया। उसकी निशानदेही पर उसके चार अन्य साथियों 21 वर्षीय अर्चिरयन गोरख कांबले, 25 वर्षीय अजीज मीरन शेख, 24 वर्षीय प्रणव जालिंदर गुलदगद और 25 वर्षीय विशाल दुर्गादास बाचल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के आधार पर आम लोगों के बैंक खाते हासिल करते थे। इसके बाद वे इन खातों का कंट्रोल दुबई में बैठे अपने साथी 'चैतन्य' को सौंप देते थे। इन खातों का इस्तेमाल पूरे देश में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था।




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