दिल्ली पालम हादसाः मदद मांगते-मांगते मौत के मुंह में समा गया परिवार, जानलेवा हादसे के 5 कारण
दिल्ली के पालम के साध नगर में हुए हादसे ने आसपास के लोगों को भी भयभीत कर दिया। सुबह आग लगने की जानकारी मिलने के साथ ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। लोगों ने आग में फंसे कश्यप परिवार को बचाने का भी किया जो ऊपर से मदद की गुहार लगा रहा था।

दिल्ली के पालम के साध नगर में हुए हादसे ने आसपास के लोगों को भी भयभीत कर दिया। सुबह आग लगने की जानकारी मिलने के साथ ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। लोगों ने आग में फंसे कश्यप परिवार को बचाने का भी किया जो ऊपर से मदद की गुहार लगा रहा था।
मौके पर पहुंचे लोगों ने फायर ब्रिगेड को फोन करने के साथ बगल के मकान से ऊपर चढ़कर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश भी की गई। लेकिन, पूरी इमारत में इतना धुआं भर गया था कि लोगों को इसमें सफलता नहीं मिली। पीड़ित परिवार के एक मित्र और मौके पर पहुंचे दीपक कुमार ने बताया कि अंदर का माहौल एकदम तंदूर जैसा दहकता हुआ लग रहा था।
दीपक वासन साध नगर मार्केट के पास वाली गली में ही रहते हैं। कुछ वर्षों पहले वह राजेन्द्र कश्यप के साथ काम भी करते थे, लेकिन अब अपना कारोबार है। वह दो गली पीछे ही रहते हैं और राजेन्द्र कश्यप के परिवार के साथ अच्छे रिश्ते हैं। हादसे की याद करते हुए उनके रोंगटे खड़े हो गए।
उन्होंने बताया कि सुबह के समय उनकी बहन ऊषा वासन किसी काम से छत पर गई थीं। वहीं से उसने देखा कि राजेन्द्र कश्यप के घर से बहुत धुआं निकल रहा है। वो तुरंत भागती हुई नीचे आई और दीपक को सोते से जगाते हुए कहा कि राजेन्द्र जी के घर में आग लग गई है। इतना सुनते ही वह तुरंत उठकर मौके की ओर भागे। वह मकान के सामने पहुंचे तो देखा कि ऊपर की मंजिल पर राजेन्द्र कश्यप के बेटे अनिल व अन्य लोग जान बचाने की गुहार लगा रहे थे।
वह कुछ लोगों के साथ मिलकर बगल के मकान से ऊपर की मंजिल तक पहुंचे। जब लोगों ने दीवार तोड़ी तो अंदर आग और धुआं भरा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि जैसे अंदर तंदूर बन गया हो। पूरा घर दहक रहा था।
पांच कारण जो बने जानलेवा
नहीं खुले हाईड्रोलिक
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने की सूचना जब फायर ब्रिगेड को दी गई तो कुछ ही समय बाद दमकल के वाहन मौके पर पहुंच गए लेकिन, फायर ब्रिगेड के हाईड्रोलिक वाहन तुरंत नहीं खुले। काफी देर तक इसके लिए कोशिश की जाती रही। इस बीच दूसरी हाईड्रोलिक मशीन बुलाई गई। इस बीच में काफी वक्त बीत गया और लोगों के बचाव को लेकर उम्मीदें भी कम होती गईं।
संकरा निकास
साध नगर मार्केट में लगभग 200 दुकानें होने का अनुमान है। यहां की ज्यादातर दुकानों में नीचे बेसमेंट बना हुआ है। ऊपर की मंजिलों पर दुकान-शोरूम और उससे ऊपर की मंजिलों पर लोग परिवार सहित रहते हैं। इसके चलते घर तक पहुंचने का प्रवेश और निकास बेहद छोटा हो जाता है। आमतौर पर सीढ़ियों पर भी दुकान-शोरूम का सामान रखा रहता है। इससे बाहर निकलने में मुश्किल हो जाती है।
फायर अलार्म न होना
पूरी इमारत बहुत ज्यादा हवादार नहीं थी इसके चलते अंदर ही अंदर धुआं भरने लगा और आग भड़कती गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर घर या दुकान में फायर अलार्म लगा होता तो ज्यादा संभावना है कि अलार्म की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुल जाती और इतना नुकसान नहीं होता।
कम खुला स्थान
इमारत के आवासीय हिस्से में बालकनी नहीं होने के चलते भी मुसीबत कई गुना बढ़ गई। घर की छत पर सोलर पैनल भी लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पहली और दूसरी मंजिल को मोटे ग्लास की परत से पूरी तरह से बंद नहीं किया गया होता तो हादसे का प्रभाव कम हो सकता था। सबसे ऊपर की मंजिल पर बालकनी खुली हुई थी लेकिन यह इतनी ऊंचाई पर थी कि वहां से नीचे उतरना या कूदना भी बहुत मुश्किल साबित होता।
तारों का जाल
पूरे बाजार में बिजली और डाटा के तार जगह-जगह लगे हैं। एक-एक खंबे पर तारों का इतना जाल फैला हुआ है कि यह तय करना भी मुश्किल है कि कौन सा तार किसका है। इसके अलावा गली भी इतनी कम चौड़ाई वाली है कि फायर ब्रिगेड के वाहनों को अंदर घुसने में परेशानी होती है। सुबह के समय होने के चलते फिर भी बाजार खाली था और फायर ब्रिगेड के वाहन अंदर पहुंच गए।




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