पालम के जिस घर में जिंदा जले 9, किस्मत ने 7 को भेज दिया था बाहर; साथ रहते थे 19 लोग
यह हादसा और भी भयावह हो सकता था, लेकिन किस्मत से 7 लोग अलग-अलग कारणों से घर से बाहर थे। ऊपर के दो मंजिलों में 19 लोगों का एक संयुक्त परिवार रहता था।

दिल्ली के पालम में बुधवार सुबह एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक बुजुर्ग महिला, उनके दो बेटे, बेटी, दो बहू और तीन नाबालिग बच्चियां शामिल हैं। यह हादसा और भी भयावह हो सकता था, लेकिन किस्मत से 7 लोग अलग-अलग कारणों से घर से बाहर थे। ऊपर के दो मंजिलों में 19 लोगों का एक संयुक्त परिवार रहता था।
पुलिस के मुताबिक, पालम गांव स्थित साध नगर के राम चौक मार्केट में एक चारमंजिला इमारत के बेसमेंट, भूतल और पहले तल्ले पर कॉस्मेटिक और कपड़ों का थोक व्यापार होता था। इन तलों पर भारी मात्रा में सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक और केमिकल वाले कॉस्मेटिक उत्पाद रखे थे। सुबह 6:15 बजे शॉर्ट सर्किट से इमारत में आग लग गई और इन सामानों ने आग को बारूद जैसी रफ्तार दे दी।
राजेंद्र कश्यप का उजड़ा परिवार
भवन मालिक 71 वर्षीय राजेंद्र कश्यप का परिवार ऊपर के दो तलों पर सो रहा था। हादसे में जान गंवाने वालों में राजेंद्र कश्यप की पत्नी लाडो, बेटे कमल और प्रवेश, बेटी हिमांशी, पुत्रवधु दीपिका और आशू, 15 वर्षीय पौत्री निहारिका, छह वर्षीय इवानी और तीन वर्षीय जेसिका शामिल हैं। वहीं, राजेंद्र के बेटे सचिन, अनिल और दो वर्षीय पौत्री मिताली घायल हैं। सचिन 25% तक जल गया है,जो सफदरजंग में भर्ती है। दमकल की टीम के मौके पर पहुंचने से पहले आग को तेजी से फैलता देख जान बचाने के लिए राजेंद्र के बेटे अनिल ने अपनी बेटी को दूसरे तल से नीचे फेंक दिया था। इसके बाद वह फिर खुद भी नीचे सड़क पर कूद गया।
जो बाहर गए थे, वो बच गए
राजेन्द्र कश्यप के पांच बेटे कमल, सुनील, प्रवेश, अनिल और सचिन हैं। एक बेटी है हिमांशी। सचिन और हिमांशी का विवाह नहीं हुआ था। यह पूरा 19 लोगों का एक बड़ा परिवार था। बुधवार सुबह 19 में से परिवार के बारह लोग घर पर मौजूद थे, जबकि सात लोग अलग-अलग कारणों से बाहर थे।
राजेन्द्र कश्यप गोवा गए हुए थे। सुनील अपनी पत्नी डॉली और बेटे हर्षित और कैरव के साथ हिमाचल गए हुए थे। प्रवेश ने एक दिन पहले ही अपनी पत्नी कविता और बेटे व्योम को उनके ननिहाल में नजफगढ़ छोड़ा था। घर से बाहर होने के चलते परिवार के ये लोग तो हादसे की चपेट में आने से बच गए, जबकि इमारत के अंदर मौजूद परिवार के सदस्यों को या तो जान गंवानी पड़ी या फिर वे गंभीर हालत में पहुंच गए हैं। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग जब तक दिल्ली लौटे, उनका आधा परिवार तब तक दुनिया छोड़ चुका था।




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