पालम की आग में 9 जले, चिल्लाते रहे लोग और फायर ब्रिगेड की लिफ्ट ही निकली खराब
दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह जब अधिकतर लोगों की आंख भी नहीं खुली थी, वहां एक परिवार के लिए मौत की ज्वालामुखी फट चुकी थी। मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोग जान बचाने के लिए कूदने को मजबूर हो गए।

दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह जब अधिकतर लोगों की आंख भी नहीं खुली थी, वहां एक परिवार के लिए मौत की ज्वालामुखी फट चुकी थी। मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुछ लोग जान बचाने के लिए कूदने को मजबूर हो गए। वहीं मौके पर मौजूद रहे कुछ चश्मदीदों का दावा है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी को वहां पहुंचने में काफी वक्त लगा और जब आई भी तो उसकी हाईड्रोलिक लिफ्ट ही खराब था। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि मशीन ठीक होती तो संभवत: जानें बचाई जा सकती थीं।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मौके पर सबसे पहले पहुंचने का दावा करते हुए एक शख्स ने कहा, ‘करीब 6.45 पर मेरा बेटा कॉलेज जाने के लिए बाहर निकला तो उसने देखा कि आग लगी हुई है। तब वहां कोई नहीं था। उसने मुझे फोन करके बताया कि आग लगी है। मैं तुरंत मदद के लिए दौड़ा और अपने पिता से कहा कि वह फायर ब्रिगेड को फोन करें। उन्होंने 6.50 पर कॉल कर दिया था। मैं जब आया तो आग फैल चुकी थी। मैंने आवाज लगाई को जो भी सदस्य हैं वे ऊपर चढ़े। लोग हमें छज्जे पर नजर आ रहे थे। एक की आवाज आई कि हम छज्जे पर हैं। हमने ऊपर जाने को कहा। हम बगल वाली इमारत से ऊपर गए वहां घुसने की कोशिश की लेकिन धुएं की वजह से नहीं जा सके।’
7.40 पर पहुंची पहली मशीन, खुली नहीं: चश्मदीद
इसी चश्मदीद ने कहा कि फायर ब्रिगेड की पहली हाइड्रोलिक मशीन 7.40 पर मौके पर पहुंची। लेकिन मशीन खुल नहीं पाई। उन्होंने कहा कि जान बचाने के लिए दो लोग कूदे और एक छोटा बच्चा बचाने की कोशिश में नीचे गिर गया। वह अस्पताल में भर्ती है। पड़ोस में रहने वाले इस शख्स ने कहा कि बेसमेंट, ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर दुकानें थीं और ऊपर दो फ्लोर पर परिवार के 18 लोग रहते थे। कुछ लोग बाहर गए हुए थे, इसलिए उनकी जान बच गई। हादसे में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 3 जख्मी हैं।

बहुत धुआं था, निकल नहीं सका परिवार: चश्मदीद
एक अन्य चश्मदीद ने कहा कि हाइड्रोलिक मशीन काम करती तो माल नहीं पर बचा सकते थे लेकिन जानें तो बचाई जा सकती थीं। उन्होंने कहा, 'लोग बालकनी से चिल्लाते रहे।' मौके पर मौजूद एक शख्स ने कहा, ‘एक बच्चे को तो ऊपर से फेंका जो बहुत छोटा था। कुछ लोग कूदे। पूरा परिवार साथ रहता था। नीचे शोरूम था। ऊपर दो फ्लोर में एक बड़ा परिवार रहता था। आग नीचे लगी थी, वे भागकर नीचे नहीं आ पाए क्योंकि धुआं बहुत हो गया था।’
सौरभ भारद्वाज ने भी फायर ब्रिगेड पर सवाल उठाए
मौके पर पहुंचे आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने भी फायर ब्रिगेड पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, ‘यहां आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से मेरी बात हुई है। दूधवाले ने बताया कि यहां आग लगी है। लोगों ने फायर ब्रिगेड को फोन किया। फायर ब्रिगेड़ साढ़े सात पौने 8 बजे आई। बच्चे ऊपर से चिल्ला रहे थे कि हमें बचाओ। लेकिन फायर ब्रिगेड की हाईड्रोलिक लिफ्ट खुली नहीं। कोई दूरदराज का इलाका नहीं है। दिल्ली के बीचोंबीच यदि आग लगने पर हम लोगों को नहीं बचा पा रहे हैं तो बड़ा सवाल उठता है। जून 2025 में द्वारका में आग लगी थी, फायर ब्रिगेड की गाड़ी लेट से आई तीन ऊपर से कूदे और मर गए। रोहिणी में झुग्गियों में आग लगी तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां डेढ़ घंटे बाद पहुंचीं, जबकि पांच मिनट की दूरी है। दो छोटे बच्चे जलकर मर गए।’
मजिस्ट्रेट जांच का आदेश
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) का कहना है कि सुबह करीब 7 बजे पालम मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत में आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद दमकल के 30 वाहन मौके पर भेजे गए और आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए अभियान शुरू किया गया। इस बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश दिए हैं। उधर, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अपनी पहली बैठक की बुधवार को अध्यक्षता करते हुए पूरे शहर में व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए।




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