दिल्ली में यमुना किनारे दौड़ेगी साइकिल; 53 किमी कॉरिडोर विकसित करेगा डीडीए
दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए यमुना नदी के किनारे 52 किलोमीटर लंबा एक विशेष साइकिल कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रहा है। कॉरिडोर वजीराबाद बैराज से डीएनडी फ्लाईवे तक फैला होगा।

डीडीए यमुना नदी के किनारे लगभग 53 किलोमीटर लंबा एक विशाल साइकिल कॉरिडोर बनाने जा रहा है। यह ट्रैक वजीराबाद से डीएनडी फ्लाईवे तक फैला होगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नदी से जोड़ना और प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देना है। ट्रैक के निर्माण में खास सामग्री का उपयोग होगा जिससे पानी जमीन में रिस सके ताकि पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे। कॉरिडोर पर डॉकिंग स्टेशन, पार्किंग और छायादार आराम करने वाली जगहें भी मिलेंगी।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने एक बयान में बताया कि वह यमुना के फ्लडप्लेन के साथ लगभग 52.95 किलोमीटर लंबा साइकिल कॉरिडोर विकसित करेगा। यह पूरा ट्रैक वजीराबाद बैराज से लेकर डीएनडी फ्लाईवे तक होगा। परियोजना का पहला हिस्सा पुराने रेलवे पुल से एनएच-24 तक 24.15 किलोमीटर का है। इसका निर्माण कार्य अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। विस्तृत सर्वेक्षण और संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाने के बाद पहले चरण को तैयार होने में लगभग 12 महीने लगने की उम्मीद है।
पहले चरण में कहां से कहां तक का दायरा?
परियोजना का मुख्य केंद्र इसका पहला चरण है, जो पुराने रेलवे पुल से लेकर एनएच-24 तक नदी के दोनों किनारों पर फैला है। इसे विशेषज्ञों की टिप्पणियों के आधार पर तैयार किया है, जिससे पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और व्यावहारिक उपयोगिता दोनों सुनिश्चित की जा सकें। वहीं, परियोजना को यमुना रिवरफ्रंट के साथ जन-भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लोगों को नदी से जोड़ने की कवायद
डीडीए ने एक बयान में बताया कि यह प्रस्ताव नदी के पारिस्थितिक परिदृश्य के जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार रणनीति का हिस्सा है। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना केवल आवागमन से जुड़ा एक उपाय मात्र नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक नियंत्रित और टिकाऊ तरीके से नदी से फिर से जोड़ने के एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है।
मनोरंजन के ज्यादा अवसर देगा कॉरिडोर
इसमें प्रदूषण रहित परिवहन को बढ़ावा दिया है। साइकिल कॉरिडोर लोगों को मनोरंजन के ज्यादा अवसर देगा। साथ ही, यमुना के किनारे मौजूद मुख्य पारिस्थितिक और मनोरंजक केंद्रों को आपस में जोड़ने में मदद करेगा।
छायादार आरामगाह से लेकर पार्किंग क्षेत्र होंगे विकसित
साइकिल ट्रैक में ऐसे मटीरियल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनसे पानी रिस सके। साथ ही, डॉकिंग स्टेशन, पार्किंग एरिया, छायादार आरामगाह और रास्ता दिखाने वाले सिस्टम जैसी सुविधाएं भी होंगी। ये सभी आस-पास के प्राकृतिक नजारों के साथ पूरी तरह से घुल-मिल जाने के हिसाब से डिजाइन किए जाएगें। इसका उद्देश्य यह है कि डूब क्षेत्रों के पारिस्थितिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाए बिना इन सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सके।




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