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दिल्ली में 142 गेस्ट टीचरों की नौकरी जाने का खतरा; क्या है वजह?

दिल्ली के 142 गेस्ट टीचरों पर नौकरी से निकाले जाने का खतरा है। प्रशासन ने इसे लापरवाही मानकर कार्रवाई की सिफारिश की है जबकि टीचर्स एसोसिएशन ने कम वेतन का हवाला देते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की है।

Tue, 28 April 2026 07:55 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में 142 गेस्ट टीचरों की नौकरी जाने का खतरा; क्या है वजह?

दिल्ली के 142 गेस्ट टीचरों पर नौकरी से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है। इन पर पुरानी दिल्ली जिले में जनगणना ड्यूटी करने से इनकार करने का आरोप है। जिला मजिस्ट्रेट ने इसे अनुशासनहीनता और लापरवाही बताते हुए शिक्षा विभाग से उनकी सेवाएं तुरंत समाप्त करने की सिफारिश की है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे व्यवहार से सरकारी काम में बाधा आती है। यही नहीं इससे दूसरे कर्मचारियों पर गलत प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर, सरकारी टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री से इस फैसले को वापस लेने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि कम वेतन, संसाधनों की कमी और आर्थिक दिक्कतों के कारण टीचर यह ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उन्हें अतिरिक्त मानदेय दिया जाना चाहिए।

एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में 142 गेस्ट टीचरों को जनगणना की ड्यूटी निभाने से कथित तौर पर मना करने के कारण नौकरी से निकाला जा सकता है। प्रशासन ने इसको 'घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता' करार दिया है। पुरानी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने शिक्षा निदेशक को 24 अप्रैल को लिखे एक पत्र में कहा कि टीचरों ने जनगणना का काम करने से मना कर दिया जबकि 16 अप्रैल को एक पहले के दिए संदेश में साफ तौर पर बता दिया गया था कि जनगणना की ड्यूटी नहीं करने से क्या दिक्कतें आ सकती हैं।

पुरानी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा है कि जनगणना ड्यूटी से मना करना घोर लापरवाही है। यह सूचना मिली है कि 142 गेस्ट टीचरों ने जनगणना ड्यूटी करने से मना कर दिया है। ऐसे में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से खत्म या रद्द कर दी जाएं। इस तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने से जनगणना ड्यूटी में लगे दूसरे कर्मचारियों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। आदेश नहीं मानने पर माफ करने से जनगणना का काम बिगड़ सकता है। इससे कानूनी जिम्मेदारी निभा रहे कर्मचारियों के बीच अनुशासन कमजोर पड़ सकता है।

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एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री से लगाई गुहार

वहीं दिल्ली के सरकारी टीचर एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद से अनुरोध किया है कि गेस्ट टीचरों को नौकरी से निकालने का प्रस्ताव वापस ले लिया जाए। सरकारी टीचर एसोसिएशन के महासचिव अजय वीर ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद को लिखा कि सभी संबंधित गेस्ट टीचर सालाना कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। यह कॉन्ट्रैक्ट 8 मई को खत्म होने वाले हैं। जनगणना ड्यूटी में शामिल होने से मना करना जान-बूझकर की गई अनुशासनहीनता नहीं थी। यह काम में आने वाली दिक्कतों और बहुत कम वेतन का नतीजा था। गेस्ट टीचरों के रोजाना के वेतन में करीब 8 वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मौजूदा वक्त में गेस्ट टीचरों को जो रकम मिलती है, वह आने-जाने जैसे बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है।

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