दिल्ली-मुुंबई एक्सप्रेसवे पर आपस में बात करेंगी कारें, दिसंबर तक शुरू होगा 6G सेंसर नेटवर्क का ट्रायल
दिल्ली-मुुंबई एक्सप्रेसवे पर कारें आपस में बात करेंगी। इसके तहत सड़क पर लगे सेंसरों के जरिये वाहन एक-दूसरे को सूचना भेजने में सक्षम होंगे। भारत में स्मार्ट कारों और लीविंग इंटेलिजेंट नेशनल हाईवे की मदद से सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाया जाएगा।

दिल्ली-मुुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर कारें आपस में बात करेंगी। इसके तहत सड़क पर लगे सेंसरों के जरिये वाहन एक-दूसरे को सूचना भेजने में सक्षम होंगे। भारत में स्मार्ट कारों और लीविंग इंटेलिजेंट नेशनल हाईवे की मदद से सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाया जाएगा।
दिसंबर 2026 में दुनिया के सबसे लंबे 6जी सेंसर नेटवर्क ट्रायल की शुरुआत होने जा रही है। योजना के तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के नीचे और बगल में लाखों सेंसर बिछाए जाएंगे, जो फर्राटा भरती कारों को रेड लाइट, साइनबोर्ड, राहगीर, वाहन आदि की पहचान करने में सक्षम बनाएंगे। इस तकनीक को वी2एक्स (व्हीकल टू एवरीथिंग) संचार माध्यम कहा जाता है।
सूत्रों ने बताया, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एवं दूरसंचार मंत्रालय के बीच इसको लेकर सहमति बनी है। इसके तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के तीसरे चरण पर 6जी सेंसर नेटवर्क का दुनिया का पहला सबसे बड़ा हाईवे ट्रायल किया जाएगा। इसके तहत अवरोध या दुर्घटना होती है तो 6जी नेटवर्क के जरिए पीछे आ रही गाड़ियों के ब्रेक अपने-आप लग जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि 6जी ट्रायल का पहला प्रोटोटाइप दिसंबर 2026 तक वडोदरा-मुंबई खंड पर शुरू हो जाएगा।
क्या है वी2एक्स तकनीक
व्हीकल टू एवरीथिंग (वी2एक्स) तकनीक के जरिए वाहन एक-दूसरे को वास्तविक समय में जानकारी साझा करते हैं। विंडशील्ड पर एक डिजिटल डिस्प्ले होता है, जो आसपास की अन्य गाड़ियों, ट्रैफिक लाइट और सड़क सेंसर से मिल रहे डेटा को दिखता है। हरी, नीली और सफेद लाइनें लगातार जानकारी का आदान-प्रदान करती हैं।
सड़क तकनीक में चीन, कोरिया, जापान आगे
सड़क परिवहन की भविष्यगामी तकनीक में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान सबसे आगे हैं। चीन 5जी पर वी2एक्स में सबसे आगे है, वह 2026 तक कई शहरों को 6जी ट्रायल के लिए तैयारी कर रहा है। दक्षिण कोरिया सेफरूट 6जी तकनीक अपना रहा है। सेटेलाइट और जमीनी 6जी नेटवर्क से वाहन सुदूर पहाड़ी इलाके या सुरंग में भी नेटवर्क बनाए रखेगा। वहीं, जापान माइक्रोसेकंड लेटेंसी तकनीक का मुख्य जोर सटीकता पर है। इसमें वाहन 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर भी आपस में टकराएंगे नहीं।
1350 KM दूरी 12 घंटे में होगी पूरी
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे लंबी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है। 1,350 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पूरा होने पर यह देश की राजधानी दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा और दोनों महानगरों के बीच यात्रा समय को वर्तमान 24 घंटे से घटाकर केवल 12 घंटे कर देगा। दिल्ली से शुरू होने वाला यह एक्सप्रेसवे 5 राज्यों- हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरता है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक बस-ट्रक दौड़ते देखना मेरा सपना : गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बीते साल नवंबर में गुजरात के सूरत में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते कहा था कि हम सभी बाधाओं को दूर कर परियोजना को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क अच्छी तरह तैयार हुई है। हम लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके छोटी–मोटी कमियों को भी दूर कर रहे हैं। गडकरी ने कहा था, ‘‘भविष्य में मेरा इस सड़क पर इलेक्ट्रिक ट्रक और बसें दौड़ते देखने का सपना है। हम इस परियोजना में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी शामिल करेंगे ताकि परिवहन लागत कम हो सके। मेरा मानना है कि यह सड़क तैयार होने के बाद निर्यात के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और लोगों की यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।’’
(भाषा के इनपुट के साथ)




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