16000 trees cut in Gurugram for Delhi Mumbai Expressway expansion, RTI reveals दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के लिए गुरुग्राम में 16000 पेड़ काट डाले, लेकिन…; RTI में चौंकाने वाला खुलासा, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के लिए गुरुग्राम में 16000 पेड़ काट डाले, लेकिन…; RTI में चौंकाने वाला खुलासा

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान गुरुग्राम जिले में हुई करीब 16 हजार पेड़ों की कटाई और इनके बदले किए गए कागजी वनीकरण की पोल खुली है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में खुलासा हुआ। आरटीआई रिपोर्ट के आंकड़ों ने पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है।

Tue, 20 Jan 2026 09:13 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के लिए गुरुग्राम में 16000 पेड़ काट डाले, लेकिन…; RTI में चौंकाने वाला खुलासा

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान गुरुग्राम जिले में हुई करीब 16 हजार पेड़ों की कटाई और इनके बदले किए गए कागजी वनीकरण की पोल खुली है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में खुलासा हुआ। आरटीआई रिपोर्ट के आंकड़ों ने पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे विस्तार के लिए कुल 9,650 पूर्ण विकसित पेड़ और 6,234 छोटे पौधे काटे गए। यानी 15,884 पेड़ों-पौधों पर कुल्हाड़ी चली। सड़क को चौड़ा करने के लिए करीब 51.12 हेक्टेयर सुरक्षित वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 9 अगस्त 2018 को इस शर्त पर मंजूरी दी थी कि काटे गए पेड़ों की भरपाई 'क्षतिपूर्ति वनीकरण' (सीए) के माध्यम से की जाएगी।

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जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है एनएचएआई : वैशाली राणा

पर्यावरणविद वैशाली राणा के अनुसार, राजीव चौक से सोहना बॉर्डर के बीच विकास के नाम पर हजारों पेड़ों को काटा गया, लेकिन उनके बदले में लगाए जाने वाले पौधे धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पेड़ों की कटाई से पहले जहां क्षतिपूर्ति वनीकरण किया जाना है, इसके लिए निर्माण एजेंसी विभाग में पैसे जमा करवाती है। पैसे विभाग के पास जमा है। वैशाली राणा ने आरोप लगाया कि एनएचएआई अक्सर वनीकरण के लिए फंड जमा करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, जबकि वन विभाग उस फंड का सही उपयोग कर नए जंगल विकसित करने में रुचि नहीं दिखाता। अरावली की तलहटी में स्थित इस क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कटना शहर के गिरते भूजल स्तर और प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है।

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पर्यावरणविदों का आरोप, बदले में पौधे नहीं लगाए

पर्यावरणविद वैशाली राणा का आरोप है कि नियमों के मुताबिक, परियोजनाओं के लिए काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाना अनिवार्य है। इस हिसाब से सोहना रोड पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए करीब 1.5 लाख नए पौधे लगाए जाने चाहिए थे। वन विभाग यह बताने में विफल रहा है कि यह 1.5 लाख पौधे किस स्थान पर लगाए गए हैं और क्या वह भूमि वन विभाग के रिकॉर्ड में संरक्षित है। विभाग ने आरटीआई में जवाब दिया है कि उन्होंने सोहना रोड से काटे गए पेड़ों की जगह नूंह और पंचकूला मोरनी में 40 हजार पेड़-पौधे लगाए हैं।

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