लखनऊ विधानसभा को भी उड़ाने की थी साजिश; दिल्ली ब्लास्ट में NIA के बड़े खुलासे
लाल किला विस्फोट मामले में एनआईए ने खुलासा किया था कि आरोपी संदिग्ध आतंकी विधानसभा और अन्य प्रमुख स्थानों को निशाना बनाना चाहते थे। एनआईए ने कड़ियों को जोड़ते हुए पूरी साजिश का भंडाफोड़ किया है।

दिल्ली में लाल किला के पास कार धमाके में एनआईए की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद पिछले साल अगस्त में लखनऊ गए थे। इन आरोपियों ने विधानसभाए सचिवालय और भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे प्रमुख स्थानों की रेकी की थी ताकि वे वहां धमाकों को अंजाम दे सकें। आरोपियों ने ‘शैतान की मां’ (टीएटीपी) नामक खतरनाक विस्फोटक बनाने के लिए लखनऊ में रसायनों की दुकानें खोजीं और एक सुनसान ठिकाने की तलाश की। एनआईए ने तकनीकी सबूतों और गवाहों के जरिए कड़ियों को जोड़ते हुए पूरी साजिश का भंडाफोड़ किया है।
लखनऊ विधानसभा समेत अन्य जगहों को बनाना था निशाना
आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि आरोपियों की ओर से लखनऊ में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की एक भयावह साजिश का खुलासा हुआ है। इसमें लखनऊ विधानसभा और अन्य प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया जाना था जहां लोगों की आवाजाही अधिक होती है।
फरीदाबाद से लखनऊ गए थे संदिग्ध
दो मुख्य आरोपी (डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद) इस आतंकी साजिश के लिए एक 'सुनियोजित टोही यात्रा' के तहत 25 से 30 अगस्त, 2025 के बीच हरियाणा के फरीदाबाद से लखनऊ गए थे।
धमाका करने की बड़ी साजिश
सूत्रों के अनुसार, मुजम्मिल ने यूपी सरकार के प्रतीक माने जाने वाले विभिन्न ठिकानों की रेकी की। उसने विधानसभा, बापू भवन (सचिवालय) और इमामबाड़ा, लाल बाग और अमीनबाद जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी की। आरोपियों ने इन स्थानों को सटीक टार्गेट माना। आरोपी इन भवन परिसरों के पास विस्फोटकों से भरी कार में धमाका करने की साजिश रच रहे थे।
'शैतान की मां' का कर रहे थे इंतजाम
NIA की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी मुजम्मिल ने अपने फोन का इस्तेमाल लखनऊ में उन रासायनिक दुकानों को खोजने के लिए किया था जिनमें ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) के निर्माण के लिए जरूरी 2 रसायन मौजूद थे। टीएटीपी एक अत्यधिक अस्थिर पेरोक्साइड विस्फोटक है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'शैतान की मां' के रूप में जाना जाता है।
शाहीन के एक रिश्तेदार के घर रुके थे संदिग्ध
सूत्रों ने बताया कि उक्त विस्फोटक का इस्तेमाल पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले में हुए कार विस्फोट में किया गया था। शाहीन ने मुजम्मिल के निर्देशों पर इन संबंधित दुकानों के नाम अपनी लिखावट में लिखे थे। दोनों लखनऊ में शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर रुके थे। मुजम्मिल ने लखनऊ के रहने वाले और शहर से परिचित एक गवाह से इन दुकानों पर जाकर बड़ी मात्रा में रसायनों की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेने के लिए भी कहा था।
फरीदाबाद जैसा ठिकाना तलाश रहे थे आरोपी
मुजम्मिल ने इस गवाह को इसलिए शामिल किया क्योंकि वह स्थानीय निवासी था और बिना संदेह पैदा किए पूछताछ कर सकता था। आरोपियों ने शहर के एक सुनसान इलाके में भी ऐसी जगह की तलाश की, जहां वे गुप्त रूप से विस्फोटक बनाने की अपनी गतिविधियां चला सकें। आरोपी फरीदाबाद के खोड़ी जमालपुर स्थित किराए के मकान जैसे ठिकाने की तलाश कर रहे थे।
खुलासे चार्जशीट का हिस्सा
एनआईए ने कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और तकनीकी जांच सहित विस्तृत जांच के माध्यम से, वित्तीय लेन-देन का पता लगाकर, लखनऊ यात्रा के दौरान घटी घटनाओं की कड़ियां मिलाने का काम किया है। ये खुलासे एनआईए की ओर से 14 मई को दाखिल किये गए 7,500 पृष्ठों की विस्तृत चार्जशीट का हिस्सा हैं। यह चार्जशीट दिल्ली ब्लास्ट को लेकर तैयार की गई है।




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