delhi high court says not any construction in yamuna floodplain under pretext of graveyard कब्रिस्तान भी नहीं, यमुना बाढ़ वाले इलाकों में नहीं कर सकते निर्माण- दिल्ली HC की दो-टूक, Ncr Hindi News - Hindustan
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कब्रिस्तान भी नहीं, यमुना बाढ़ वाले इलाकों में नहीं कर सकते निर्माण- दिल्ली HC की दो-टूक

दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसी भी प्रकार के निर्माण या रिहायशी कब्जे पर रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कर दिया कि कब्रिस्तान या धार्मिक उपयोग के नाम पर भी ऐसी अनुमति नहीं दी जा सकती है।

Tue, 30 Dec 2025 09:26 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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कब्रिस्तान भी नहीं, यमुना बाढ़ वाले इलाकों में नहीं कर सकते निर्माण- दिल्ली HC की दो-टूक

दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण या रिहायशी कब्जे पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया है कि भले ही ऐसा कब्जा कब्रिस्तान या धार्मिक इस्तेमाल के बहाने से किया जाए। कब्रिस्तान या धार्मिक इस्तेमाल के नाम पर भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अवैध निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके साथ ही अदालत ने नौ गजा पीर दरगाह और पास के कब्रिस्तान के पास हो रहे अवैध कब्जों पर चिंता जताई। अदालत ने डीडीए को एक हफ्ते के भीतर संबंधित क्षेत्र में बाड़ लगाने का आदेश भी जारी किया है। कोर्ट ने सभी कब्जेधारियों को 10 जनवरी 2026 तक जमीन खाली करने का सख्त निर्देश दिया है।

बाढ़ प्रभावित एरिया में निर्माण की इजाजत नहीं

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को घर, मकान, शेड या अन्य निर्माण करने की इजाजत नहीं है। सुनवाई के दौरान पीठ को नौ गजा पीर दरगाह और पास के कब्रिस्तान इलाके में जमीन के लगातार अवैध उपयोग की जानकारी दी गई।

एक हफ्ते में लगाएं बाड़

कब्रिस्तान के केयरटेकर ने दावा किया कि यह जमीन वक्फ बोर्ड को अलॉट की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि लगभग एक दशक पहले वहां कोई कब्रिस्तान नहीं था और हाल ही में निर्माण किए गए हैं। पीठ ने पाया कि इलाके में बड़े पेड़ उखाड़ दिए गए और निर्माण कार्य किया गया, जिससे यह स्थिति चिंताजनक है। अदालत ने आदेश दिया कि डीडीए एक हफ्ते में बाड़ लगाने का काम करे।

डीडीए को जारी किया आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर कब्रिस्तान की बाड़ लगाए, ताकि जमीन में और विस्तार रोका जा सके। साथ ही पीठ ने कहा कि नए निर्माण या कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसी भी दफनाने का काम केवल बाड़ वाले क्षेत्र के भीतर ही किया जाएगा और इसके बाद किसी को वहां रहने या ठहरने की इजाजत नहीं होगी।

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10 जनवरी तक जमीन खाली करने का निर्देश

अदालत ने सभी पक्षकारों, जिनमें केयरटेकर भी शामिल हैं, को 10 जनवरी 2026 तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी। यह फैसला बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अवैध निर्माण रोकने और यमुना के किनारे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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