Delhi High Court orders action against police officers for concealing material and misleading court SHO और जांच अधिकारी पर ऐक्शन लें DCP, मर्डर मामले में HC ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई, Ncr Hindi News - Hindustan
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SHO और जांच अधिकारी पर ऐक्शन लें DCP, मर्डर मामले में HC ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में अदालत से महत्वपूर्ण सामग्री छिपाने, भ्रामक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने और अभियोजन पक्ष की सहायता नहीं करने के लिए दिल्ली पुलिस के दोषी अधिकारियों को फटकार लगाई। कोर्ट ने डीसीपी को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

Thu, 19 Feb 2026 04:17 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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SHO और जांच अधिकारी पर ऐक्शन लें DCP, मर्डर मामले में HC ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में अदालत से महत्वपूर्ण सामग्री छिपाने, भ्रामक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने और अभियोजन पक्ष की सहायता नहीं करने के लिए दिल्ली पुलिस के दोषी अधिकारियों को फटकार लगाई।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया ने मर्डर से जुड़े आरोपी की याचिका पर कहा कि जांच अधिकारी और एसएचओ ने अभियोजक को सहायता न देकर असंवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एसएचओ द्वारा मुख्य गवाह की महत्वपूर्ण गवाही को छिपाने और एक अधूरी और भ्रामक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करना चौंकाने वाली थी।

यह एक चौंकाने वाली स्थिति

कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल जांच अधिकारी और एसएचओ द्वारा अभियोजन पक्ष को सहायता नहीं देने का असंवेदनशीलता का ही नहीं है, बल्कि यह एक चौंकाने वाली स्थिति भी है कि तत्कालीन बवाना थाने के एसएचओ ने 14 जुलाई 2025 को एक अधूरी और भ्रामक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की थी। बताया जाता है कि बवाना थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर रजनीकांत थे। उक्त स्थिति रिपोर्ट में एसएचओ ने अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह के बयान के महत्वपूर्ण हिस्से को छिपा दिया।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी को दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस आदेश की प्रति संबंधित डीसीपी को भी भेजी जाए ताकि वे दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकें।

चार साल से अधिक समय से जेल में

याचिकाकर्ता अमन पर गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या करने का आरोप है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की लागू धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अमन ने जमानत के लिए कोर्ट में याचिका दायर की। उसने तर्क दिया कि वह चार साल से अधिक समय से जेल में है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

मृतक की पत्नी का बयान अधूरा था

जस्टिस कथपालिया ने टिप्पणी की कि पुलिस ने हाई कोर्ट में अपनी स्थिति रिपोर्ट में अपूर्ण साक्ष्य पेश किए हैं। जांच में पाया गया कि मृतक की पत्नी का बयान अधूरा था। यह बात सामने आई कि ट्रायल कोर्ट में उसकी मुख्य पूछताछ के दिन जांच अधिकारी घटना की सीसीटीवी फुटेज दिखाने के लिए अपना लैपटॉप लाना भूल गया था।

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इसलिए, जांच अधिकारी ने स्थिति रिपोर्ट में पत्नी की अधूरी गवाही दर्ज की, जो हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने के बराबर है। जब ट्रायल कोर्ट के समक्ष पत्नी की पूछताछ जारी रही तो उसने सीसीटीवी फुटेज में आरोपी अमन की पहचान नहीं की।

आरोपी की पहचान करने में असमर्थ रही गवाह

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि गवाह से प्रारंभिक पूछताछ 8 अगस्त 2024 को की गई थी। उसकी आगे की पूछताछ स्थगित कर दी गई थी क्योंकि जांच अधिकारी घटना के सीसीटीवी फुटेज को चलाने के लिए लैपटॉप नहीं लाया था। स्थिति रिपोर्ट में गवाह की केवल वही आंशिक गवाही दर्ज की गई थी। इसके बाद गवाह की आगे की पूछताछ 17 फरवरी 2025 को रिकॉर्ड की गई थी और जिसे इस कोर्ट से छिपाया गया था। इसमें सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने पर गवाह ने आरोपी की पहचान करने में असमर्थता व्यक्त की।

.32 बोर की बंदूक, .315 बोर की गोलियां

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गवाही का वह हिस्सा आज आरोपी के वकील द्वारा पेश किया गया है और अभियोजन पक्ष द्वारा इसकी सत्यता पर कोई विवाद नहीं है। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि बरामद किया गया हत्या का हथियार .32 बोर की बंदूक थी, जबकि मृतक के शरीर से बरामद गोलियां .315 बोर की थीं। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में कोर्ट ने यह देखते हुए आरोपी को जमानत दे दी कि उसके खिलाफ दर्ज चार आपराधिक मामलों में से दो में उसे बरी कर दिया गया था और एक मामले में समझौता हो गया था।

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अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि मुझे आवेदक की आगे की स्वतंत्रता छीनने का कोई कारण नहीं दिखता। इसलिए, जमानत याचिका स्वीकार की जाती है और 10000 रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती को लोअर कोर्ट की संतुष्टि के अनुरूप पेश करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। कोर्ट ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का भी निर्देश दिया।

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