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अदालती दस्तावेजों में भी ना बताएं पीड़िता की पहचान, दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामलों में पीड़िता की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि पुलिस की ओर से पेश की जाने वाली किसी भी रिपोर्ट में पीड़िता का नाम, पता या माता-पिता का विवरण नहीं होना चाहिए। 

Mon, 26 Jan 2026 05:33 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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अदालती दस्तावेजों में भी ना बताएं पीड़िता की पहचान, दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न पीड़ितों की गोपनीयता को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की ओर से अदालत में पेश की जाने वाली किसी भी स्टेटस रिपोर्ट या दस्तावेज में दुष्कर्म पीड़िता का नाम, माता-पिता का विवरण या पता नहीं होना चाहिए। यह आदेश एक पॉक्सो मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए दिया गया जहां पुलिस ने गलती से पीड़िता की पहचान उजागर कर दी थी। अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे सभी थाना प्रभारियों को कानून का सख्ती से पालन करने की हिदायत दें।

थाना प्रभारियों को दें सख्त निर्देश

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया है कि यौन उत्पीड़न पीड़िता का नाम, माता-पिता का नाम या पता अदालत में दाखिल किसी भी दस्तावेज में नहीं लिखा जाना चाहिए। पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से कहा है कि वे सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों को यौन अपराध पीड़िता की पहचान गुप्त रखने के कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें। पीठ ने यह आदेश पॉक्सो मामले में एक आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया।

किसी भी अदालती दस्तावेज में ना लिखें नाम

पीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि जांच अधिकारी की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में पीड़िता का नाम लिखा गया था। पीठ ने आदेश दिया कि मोती नगर थाने के अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस आयुक्त अपने क्षेत्र के सभी थानाध्यक्षों को सख्त निर्देश दें कि यौन उत्पीड़न पीड़िता का नाम, उसके माता-पिता की पहचान या पता अदालत में दाखिल किसी भी रिपोर्ट या दस्तावेज में न लिखा जाए। पीठ ने आगे निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति संबंधित पुलिस उपायुक्त के साथ-साथ दिल्ली के पुलिस आयुक्त को जानकारी व पालन के लिए भेजी जाए।

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क्या था पूरा मामला?

मौजूदा मामले में आरोपी ने कथित तौर पर वर्ष 2021 में एक 13 साल की नाबालिग लड़की को झूठे बहाने से उसके घर से ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया था। आरोप है कि उसने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और बाद में उसके परिवार वालों ने उसे ढूंढकर बचाया। हालांकि आरोपी का कहना था कि नाबालिग की मां की सहमति से पर यह संबंध बने लेकिन अदालत ने आरोपों को गंभीर श्रेणी का मानते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

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