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केजरीवाल के केस से क्यों हाई कोर्ट के जज ने खुद को किया अलग, खुद बताई वजह

दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस तेजस कारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा से जुड़ी एक वजह बताते हुए खुद को अलग किया।

Wed, 22 April 2026 03:16 PMSudhir Jha हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केजरीवाल के केस से क्यों हाई कोर्ट के जज ने खुद को किया अलग, खुद बताई वजह

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने बुधवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इस याचिका में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व अन्य के खिलाफ अदालत की कार्यवाही के वीडियो क्लिप कथित रूप से अपलोड व साझा करने पर अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। जस्टिस ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा से जुड़ी एक वजह बताते हुए खुद को अलग किया।

इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा को आबकारी नीति मामले में सुनवाई से अलग करने के अनुरोध वाली पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल की याचिका पर अदालत की सुनवाई के वीडियो अपलोड और साझा किए थे। अधिवक्ता वैभव सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूति करिया की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी। पीठ ने निर्देश दिया कि मामले को गुरुवार को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई यह पीठ नहीं करेगी। इसे कल ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें हममें से एक न्यायमूर्ति तेजस कारिया सदस्य न हों।'

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याचिकाकर्ता के वकील ने अनुरोध किया कि मामले को ऐसी दूसरी पीठ को भेजा जाए, जो इसी तरह के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। आप नेताओं के अलावा इस जनहित याचिका में उच्च न्यायालय प्रशासन तथा सोशल मीडिया कंपनियां मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स व गूगल को भी पक्षकार बनाया गया है।

न्यायमूर्ति करिया ने क्यों खुद को किया अलग

दरअसल न्यायमूर्ति तेजस करिया की तरफा से कहा गया कि वह न्यायाधीश बनने से पहले सोशल मीडिया की प्रमुख कानूनी सलाहकार कंपनी में साझेदार थे और कई मामलों में मेटा की तरफ से पेश हो चुके हैं। इसलिए इस मामले को मेटा के खिलाफ सुनना उनके लिए उचित नहीं है।

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याचिका में क्या कहा गया है

याचिकाकर्ता सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि अदालत की रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर साझा करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। यह उच्च न्यायालय के नियमों के तहत भी प्रतिबंधित है। याचिका में दावा किया गया कि आम आदमी पार्टी के कई नेताओं व कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सहित अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने 13 अप्रैल को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष केजरीवाल की पेशी के वीडियो को जानबूझकर रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, ताकि जनता की नजर में अदालत की छवि धूमिल की जा सके। याचिका में आरोप लगाया गया कि केजरीवाल व उनकी पार्टी के सदस्यों ने अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए साजिश व गंदी रणनीति रची। इसमें अनुरोध किया गया है कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जाए और 13 अप्रैल 2026 की अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग अपलोड, रीपोस्ट या फॉरवर्ड करने वाले सभी पक्षकारों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाए।

रिपोर्ट- हेमलता कौशिक

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