शराब घोटाला मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI को दी राहत, केजरीवाल की भी मान ली एक बात
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आबकारी नीति मामले में दोषमुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आबकारी नीति मामले में दोषमुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख तय की। सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय का अटपटा आदेश जरूरत के बाद एक सेकंड के लिए भी रिकॉर्ड पर नहीं रहना चाहिए और केजरीवाल और अन्य लोगों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह से अधिक का समय नहीं दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा- हमें अब तक कोई स्थगन आदेश नहीं मिला
उन्होंने कहा कि जब अधीनस्थ न्यायालय का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो जवाब देना जरूरी नहीं है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने बताया कि उन्होंने इस मामले को चुनौती देते हुए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। पीठ ने टिप्पणी की, हमें अब तक कोई स्थगन आदेश नहीं मिला है। जब तक कोर्ट कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश नहीं देता, मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में प्रतिवादियों (दूसरे पक्ष) को कानूनी नोटिस मिल चुका था, लेकिन इसके बावजूद वे तय तारीख पर पेश नहीं हुए। पिछली सुनवाई पर उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया था, लेकिन अब वे और अधिक समय की मांग कर रहे हैं। प्रतिवादियों का तर्क है कि उन्होंने इस अदालत के आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती दी है और एक रिट याचिका दायर की है। इस पर अदालत ने साफ कर दिया कि जब तक ऊपरी अदालत से कार्यवाही पर रो लगाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक यह केस कानून के मुताबिक आगे बढ़ता रहेगा। फिलहाल, अदालत ने पुराने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है।
आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि कोई जल्दबाजी नहीं है और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। अधीनस्थ न्यायालय ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था तथा सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतरता और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ है।
भाषा से इनपुट




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