आचार्य बालकृष्ण की याचिका देख क्यों भड़का दिल्ली HC? डीपफेक केस में पहुंचे थे अदालत
आचार्य बालकृष्ण डीपफेक वीडियो से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे। उनकी याचिका देख हाई कोर्ट नाराज हो गया। अदालत ने कहा कि याचिका को इतना लंबा करने की क्या जरूरत?

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को आचार्य आचार्य की याचिका पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की कि उनकी याचिका बहुत लंबी है। अदालत ने उनसे ऑनलाइन सामग्री हटाने के अपने आग्रह को सीमित करने को कहा और स्पष्ट किया कि मौजूदा स्वरूप में इतनी व्यापक याचिका पर सुनवाई संभव नहीं है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि एक सार्वजनिक व्यक्ति को आलोचना, व्यंग्य और टिप्पणी के लिए अपने विचारों को खुला रखना चाहिए। अदालत ने यह भी साफ किया कि बिना विशेष मामलों की जांच किए किसी भी सामग्री को हटाने के लिए एकमुश्त आदेश नहीं दिया जा सकता।
बालकृष्ण के क्या आरोप
आचार्य बालकृष्ण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि डीपफेक वीडियो और अन्य भ्रामक डिजिटल कंटेंट के जरिए उनकी तस्वीर और आवाज का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके वकील ने दलील दी कि इस तरह की सामग्री उनके व्यापक अनुयायियों को गुमराह कर सकती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां डिजिटल साक्षरता सीमित है। इससे उनके सम्मान और छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
हालांकि, कोर्ट ने याचिका के साथ प्रस्तुत किए गए लिंक की सूची पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि इस सूची में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों की खबरें भी शामिल हैं, जो इस मामले में पक्षकार नहीं हैं। ऐसे में बिना संबंधित प्रकाशकों को सुने उनकी सामग्री हटाने का आदेश कैसे दिया जा सकता है, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है।
पीठ ने सवाल किया कि क्या प्रकाशक को सुने बिना ऐसी सामग्री हटाया जा सकता है। अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार(24 मार्च) को होगी।




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