AC केबिन और कई लग्जरी सुविधाएं; यमुना की निगरानी को 6 करोड़ की नाव खरीदेगी दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार यमुना नदी के निरीक्षण के लिए दो वीआईपी नावों को खरीदेगी। 6.2 करोड़ की लागत वाली ये नावें कई लग्जरी सुविधाओं से लैस होगी।

दिल्ली सरकार ने यमुना नदी में निरीक्षण के लिए करीब 6.2 करोड़ की लागत से दो वीआईपी नावें खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी टेंडर के अनुसार, प्रत्येक नाव की कीमत लगभग 3.10 करोड़ होगी और इनमें वीवीआईपी/वीआईपी के लिए एसी केबिन, पेंट्री और अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा जारी टेंडर के मुताबिक, दो लग्जरी एसी बोट्स खरीदी जाएंगी। एक बोट की कीमत करीब ₹3.10 करोड़ है। 19 मार्च तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। सप्लायर फाइनल होने के बाद 5 महीने में डिलीवरी देनी होगी।
वीआईपी सुविधाओं से लैस
इन नावों को खासतौर पर वीआईपी मूवमेंट के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एयर-कंडीशंड बंद केबिन, 16–20 लोगों की क्षमता, बिजनेस क्लास पुश-बैक सीट्स, पेंट्री और वॉशरूम सुविधा, एलईडी और एम्बिएंट लाइटिंग के साथ प्रीमियम इंटीरियर और 400 लीटर फ्रेश वॉटर स्टोरेज होगा।
पब्लिक अपीयरेंस के लिए खास डेक
हर बोट में पीछे की तरफ ओपन डेक होगा, जहां वीआईपी सार्वजनिक रूप से नजर आ सकेंगे। यहां 3–4 लोगों के बैठने के लिए सोफा भी लगाया जाएगा। इन नावों में 300 एचपी इंजन, 700–1000 लीटर फ्यूल टैंक होगा। साथ ही यह लगभग 46 किमी प्रति घंटे की स्पीड से यमुना में तैरेगी। इसमें डीजल जनरेटर से पावर सप्लाई की भी सुविधा होगी।
सुरक्षा और इमरजेंसी फीचर्स
बोट्स में कई एडवांस सेफ्टी फीचर्स भी होंगे। जैसे जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस, वीएचएफ रेडियो सिस्टम, फायर पंप, मेडिकल इमरजेंसी किट और 500 मीटर गहराई मापने वाला डिवाइस होगा। यह मॉनसून और रेस्क्यू में भी उपयोगी होगा। अधिकारियों के मुताबिक, ये नाव सिर्फ वीआईपी विजिट तक सीमित नहीं होंगी। बाढ़ के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन, मॉनसून मॉनिटरिंग और छठ जैसे बड़े आयोजनों में निगरानी के भी काम आएगी।
पहले भी शुरू हो चुका है वाटर ट्रांसपोर्ट प्लान
दिल्ली सरकार हाल ही में यमुना पर क्रूज और फेरी सेवा शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत सोनिया विहार से जगतपुर के बीच 40-सीटर बोट चलाई जानी है, हालांकि इसकी शुरुआत फिलहाल टल गई है। सरकार का मानना है कि यमुना की सफाई और निगरानी के लिए लगातार उच्चस्तरीय निरीक्षण जरूरी है।




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