'रोड RADAR' की मदद से दिल्ली में प्रदूषण के हॉटस्पॉट का खोजेगी रेखा सरकार, जानिए क्या है ये पूरी पहल
अधिकारियों ने बताया कि इस सिस्टम के तहत शिकायत करने के तरीके को बहुत आसान बना दिया गया है। इसके तहत ऑटोमैटिक शिकायत भेजी जाएगी, यानी कोई सर्वेयर जैसे ही MCD-311 ऐप पर किसी समस्या की रिपोर्ट करेगा, तो वह शिकायत अपने आप कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाएगी।

राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर होने वाले पॉल्यूशन पर निगरानी रखने के लिए DPCC (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) ने शुक्रवार से एक नया प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, जिसका मकसद शहर में जमीनी स्तर पर प्रदूषण की निगरानी को मजबूत करना और यहां फैले वायु प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों का तेजी से समाधान करना है। इस बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इस पहल को 'Road RADAR' (रियल टाइम एयर पॉल्यूशन डिटेक्शन अक्रॉस रोड्स यानी सड़कों पर रियल-टाइम वायु प्रदूषण का पता लगाना) नाम दिया गया है, और इसके तहत हर जिले में होने वाले प्रदूषण का पता लगाने के लिए जमीनी स्तर के सर्वेक्षकों को तैनात किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ये सर्वेक्षक हर दिन मौके पर मौजूद रहकर एक ऐप की मदद से निगरानी का काम करेंगे, और प्रदूषण का रियल टाइम डेटा देंगे, ताकि पूरी दिल्ली की सड़कों का व्यवस्थित तरीके से सर्वे किया जा सके और रियल-टाइम में प्रदूषण के हॉटस्पॉट (सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले इलाके) की पहचान की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, 'इस नई व्यवस्था के तहत, 13 सर्वेक्षक मिलकर दिल्ली की लगभग 18,000 किलोमीटर सड़कों को कवर करेंगे। ये सड़कें दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली छावनी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी वार्डों में फैली हुई हैं।' उन्होंने बताया कि दिल्ली के पूरे सड़क नेटवर्क को हर महीने पूरी तरह से कवर किया जाएगा। हर सर्वेक्षक को रोजाना कम से कम 20 किलोमीटर सड़कों का सर्वे करने का काम सौंपा जाएगा, ताकि पूरे शहर में प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार नजर रखी जा सके।
अधिकारियों ने आगे बताया कि जिम्मेदारी निभाने के दौरान हर सर्वेक्षक MCD-311 मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके 'जियो-टैग' (स्थान-चिह्नित) वाले जमीनी सर्वे करेगा। इस दौरान वह रोजाना प्रदूषण से संबंधित कम से कम 70 जियो-लोकेशन बताएगा जो प्रदूषण से जुड़ी हों और जिनकी जियो-लोकेशन व तस्वीरें उपलब्ध हों।
पर्यावरण मंत्री ने बताए नई प्रक्रिया के सारे फायदे
इस बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'स्वच्छ हवा के लिए दिल्ली की लड़ाई को जमीनी स्तर पर हर गली और हर सड़क में जीता जाना चाहिए। 'Road RADAR' के जरिए, सरकार रोजाना निगरानी, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और सीधे तौर पर विभागीय जवाबदेही की एक वैज्ञानिक प्रणाली शुरू कर रही है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषण के स्रोतों को नजरअंदाज न किया जाए, उनकी पुनरावृत्ति न हो और उन्हें लंबे समय तक बने रहने न दिया जाए।'
नई प्रणाली कूड़ा हटाने में करेगी विभाग की मदद
सिरसा ने कहा, 'हवा में प्रदूषण की समस्या के लिए लगातार निगरानी, समय पर पहचान और जवाबदेह शासन की जरूरत है। यह पहल सड़कों की धूल, कूड़ा फेंकने की जगहें, खुले में आग जलाना, कंस्ट्रक्शन की धूल और प्रदूषण के दूसरे स्रोतों की रियल-टाइम मैपिंग करके, विभागों को तेजी से कार्रवाई करने में मदद करती है।'
प्रदूषण के स्रोत की पहचान होते ही होगी कार्रवाई
सिरसा ने कहा कि यह सिस्टम बातचीत में होने वाली देरी को कम करने, जवाब देने में लगने वाले समय को बेहतर बनाने और प्रदूषण नियंत्रण का काम संभालने वाले विभागों के बीच जवाबदेही को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, 'संदेश साफ है, प्रदूषण के जिस भी स्रोत की पहचान हो, उस पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। हर विभाग को जवाब देना होगा, और हर एजेंसी को जवाबदेह बने रहना होगा।'
अलग-अलग तरह के 11 प्रदूषण स्रोतों पर रखेंगे नजर
अधिकारियों की मानें तो यह कार्यक्रम वायु प्रदूषण के 11 अलग-अलग स्रोतों पर नजर रखेगा। इनमें कच्ची सड़कों, टूटे हुए फुटपाथों, डिवाइडरों और गड्ढों से उड़ने वाली धूल, सड़कों के किनारे जमा रेत या ढीला मलबा, अनियंत्रित पार्किंग स्थल, कूड़ा-कचरा (जिसमें ओवरफ्लो होते कचरों के ढेर या डंपिंग साइट और सड़कों के किनारे पड़ा कचरा), सड़कों के किनारे बायोमास, कूड़ा और प्लास्टिक जलाना तथा निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा, सड़कों के किनारे और डिवाइडर के बीच की वो जगह जहां हरियाली की जरूरत है, कंस्ट्रक्शन साइट्स से उड़ने वाली धूल, और हवा में प्रदूषण फैलाने वाले दूसरे बिखरे हुए स्रोतों पर नजर रखेगा, जिनकी पहचान फील्ड सर्वे के दौरान की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस सिस्टम के तहत शिकायत करने के तरीके को बहुत आसान बना दिया गया है। इसके तहत ऑटोमैटिक शिकायत भेजी जाएगी, यानी कोई सर्वे करने वाला जैसे ही MCD-311 ऐप पर किसी समस्या की रिपोर्ट करेगा, तो वह शिकायत अपने आप कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसके आगे ये शिकायतें, अधिकार क्षेत्र के हिसाब से, MCD, PWD, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), भारतीय रेलवे और दूसरी शहरी स्थानीय संस्थाओं जैसी एजेंसियों को भेजी जाएंगी।




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