नागरिकों को वंचित नहीं कर सकते; दिल्ली HC ने NHAI के कौन से फैसले को किया बहाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के एक हिस्से को समय पर पूरा न करने के कारण संबंधित ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के फैसले पर लगी रोक हटा ली है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के एक हिस्से को समय पर पूरा न करने के कारण संबंधित ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के फैसले पर लगी रोक हटा ली है।
हाई कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को सुचारु और निर्बाध आवागमन के लिए एक अच्छी तरह बनाई गए राजमार्ग से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनोद कुमार की पीठ ने साफ किया कि एनएचएआई अपने फैसले पर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के संबंधित हिस्से के निर्माण को पूरा करने के लिए किसी अन्य इकाई को नियुक्त करने के लिए नई निविदा जारी कर सकता है। पीठ ने कहा कि इस तरह की अंतरिम रोक नहीं दी जानी चाहिए थी, क्योंकि इससे परियोजना में देरी होती, जो एक राष्ट्रीय नुकसान है।
इसके चलते नागरिकों को 87 किलोमीटर के उस हिस्से के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाने को मजबूर होना पड़ता, जो या तो अधूरा है या दोनों में से किसी एक पक्ष की गलती के कारण बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। पीठ ने कहा कि किस पक्ष की गलती है, इसका निर्णय दोनों पक्षों के बीच होने वाली मध्यस्थता कार्यवाही में किया जाएगा।
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एनएचएआई की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी ठेकेदार को 2024 में तीन पैकेज का ठेका दिया गया था, लेकिन यह काम पूरा करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि इसके कारण 794 किलोमीटर लंबी पूरी परियोजना में से 87 किलोमीटर हिस्सा अधूरा रह गया। नवनिर्मित एक्सप्रेसवे से यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। वर्तमान मामला गुजरात में 35 किलोमीटर लंबे एक पैकेज से संबंधित पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद से जुड़ा है। मेहता ने कहा कि अगर स्थगन आदेश नहीं हटाया जाता, तो एनएचएआई निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना को पूरा करने के लिए किसी अन्य ठेकेदार को नियुक्त नहीं कर पाएगा।




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