दिल्ली गेट नाला 40 साल बाद साफ, राजधानी के कई इलाकों में जलभराव मिलेगी निजात
Delhi News: दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि लगभग 40 साल बाद दिल्ली गेट नाले को गाद निकालने के बाद फिर से खोल दिया गया है। इससे सैंट्रल दिल्ली के उन इलाकों में जलभराव की समस्या में काफी कमी आएगी, जहां हर साल बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।

Delhi News: दिल्ली में मॉनसून से पहले ही नालों की सफाई का काम जोरों-शोरों से जारी है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने शुक्रवार को बताया कि लगभग 40 साल बाद दिल्ली गेट नाले को गाद निकालने के बाद फिर से खोल दिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे सैंट्रल दिल्ली के उन इलाकों में जलभराव की समस्या में काफी कमी आएगी, जहां हर साल बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। बता दें कि, हर साल मॉनसून के दौरान दिल्ली में कई जगहों पर जलभराव देखने को मिलता है। प्रवेश वर्मा खुद मोर्चा संभालकर पूरे काम की निगरानी में जुटे हैं।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, "यह सिर्फ नालों की सफाई की बात नहीं है। यह सालों की अनदेखी को सुधारने और यह सुनिश्चित करने की बात है कि बारिश आने से पहले दिल्ली पूरी तरह तैयार हो। दिल्ली गेट का नाला, जो लगभग 40 साल तक ढका रहा, अब आखिरकार फिर से खोला जा रहा है और इसे ठीक से साफ किया जा रहा है। इससे वाकई जमीनी स्तर पर फर्क दिखेगा।''
काम कागजों पर नहीं जमीन पर हो रहा : प्रवेश वर्मा
मंत्री ने बताया कि विभाग ने काम करने का एक टाइम-बाउंड तरीका अपनाया है, जिसके तहत काम जल्दी शुरू किया जाता है और उस पर नियमित रूप से नजर रखी जाती है। उन्होंने कहा कि हमारा फोकस काम जल्दी शुरू करने, तेजी से काम करने और समय पर गाद निकालने का काम पूरा करने पर है। बारापुला और दिल्ली गेट पर हो रही प्रगति से यह साफ पता चलता है कि अब काम सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ जमीनी स्तर पर भी हो रहा है। वर्मा ने दिल्ली गेट के साथ-साथ बारापुला नाले का भी मुआयना किया। उन्होंने कहा कि बारापुला में गाद निकालने का काम लगभग पूरा होने वाला है।
77 नालों में से 50 प्रतिशत गाद निकालने का काम पूरा
मंत्री ने बताया कि दिल्ली गेट पर 21,000 मीट्रिक टन से अधकि गाद हटाई जा चुकी है। यहां नाले के कुछ हिस्सों को दशकों से ढकने वाली कंक्रीट की स्लैब हटाने के बाद 70% काम पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि पूरे शहर में 77 नालों में से मॉनसून से पहले ही लगभग 50 प्रतिशत गाद निकालने का काम पूरा हो चुका है और अब तक 14 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है। विभाग ने इस वर्ष 28 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है, जिसे तय समय सीमा में पूरा करने के लिए निरंतर कार्य जारी है।
इन इलाकों में कम होगा जलभराव
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली गेट नाला आईटीओ, राजघाट, दरियागंज, चांदनी चौक, सुप्रीम कोर्ट के आसपास, मथुरा रोड, जामा मस्जिद, फिरोज शाह रोड, साउथ एक्सटेंशन और ओखला जैसे इलाकों में जलभराव कम करने में मदद करेगा। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली गेट और बारापुला नाले भारी बारिश के दौरान बरसाती पानी को निकालने के लिए बेहद अहम हैं। अगर इनकी ठीक से देखरेख न की जाए, तो इतिहास गवाह है कि इनकी वजह से ही बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती रही है।
यहां आ रही थी दिक्कत
मंत्री ने बताया कि समता स्थल पार्क से गुजरने वाले दिल्ली गेट नाले का लगभग 400 मीटर का हिस्सा बीम और खंभों के सहारे कंक्रीट स्लैब से ढका हुआ था। इससे नाले के रखरखाव और गाद निकालने के काम में भारी रुकावट आ रही थी, जिसके परिणामस्वरूप नाले में पुरानी गाद जमा हो गई थी और उसकी पानी ले जाने की क्षमता भी कम हो गई थी। यह नाला दरियागंज से शुरू होता है और लगभग 2.5 किलोमीटर बहने के बाद यमुना में मिल जाता है। यह आसपास के इलाकों के लिए जल निकासी की एक अहम कड़ी का काम करता है।
एक अधिकारी ने बताया कि समता स्थल वाले हिस्से के अलावा, गांधी दर्शन से सटे हिस्सों और नाले के मुहाने पर भी गाद निकालने का काम किया गया है। गांधी दर्शन से आगे एक फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले नाले के हिस्से पर भी काम चल रहा है।




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