143 houses to be demolished in Shalimar Bagh village by Delhi High Court order दिल्ली के शालीमार बाग गांव में टूटेंगे 143 मकान, HC का 30 मई तक घर खाली करने का अल्टीमेटम, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली के शालीमार बाग गांव में टूटेंगे 143 मकान, HC का 30 मई तक घर खाली करने का अल्टीमेटम

Delhi News : दिल्ली के शालीमार बाग गांव के मेन रोड को 30 मीटर चौड़ा करने के लिए हाईकोर्ट ने 143 घरों को तोड़ने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा है कि अवैध तरीके से बनीं इमारतों को ध्वस्त किया जाए। 

Sat, 11 April 2026 06:08 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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दिल्ली के शालीमार बाग गांव में टूटेंगे 143 मकान, HC का 30 मई तक घर खाली करने का अल्टीमेटम

Delhi News : दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग गांव की मुख्य सड़क को चौड़ी करने के लिए 143 मकानों को गिराने के आदेश दिए हैं। इनमें 157 परिवार रहते हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा है कि सड़क को 30 मीटर चौड़ा करने के लिए अवैध तरीके से बनीं इमारतों को ध्वस्त किया जाए। पीठ ने मकानों को खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह एवं जस्टिस मधु जैन की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यहां इन मकानों में रहने वाले लोगों और सरकारी महकमों को विस्तार से सुना गया। मकान मालिक वैध दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहे। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण समेत अन्य विभागों ने यह साबित किया है कि ये सभी मकान सरकारी जमीन पर बने हैं। अवैध तरीके से पांच से छह मंजिल तक बने इन मकानों ने 24 मीटर जमीन घेरी हुई है। हालात यह हैं कि एम्बुलेंस, फायर बिग्रेड की गाड़ी, स्कूल बस तक नहीं निकल सकती, यहां हमेशा जाम लगा रहता है। हालात सुधारने और दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के अनुपालन के लिए इस सड़क को 30 मीटर चौड़ा करना ही होगा।

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पीठ ने कहा कि यह अवैध निर्माण मैक्स रोड शालीमार बाग गांव (हैदरपुर गांव) की सड़क संख्या-320 पर उस जगह किया गया है, जो इस मार्ग को रिंग रोड (मुकरबा चौक) से जोड़ता है। 670 मीटर लम्बे हिस्से में संबंधित क्षेत्र के जिला अधिकारी की ओर से किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि यहां 143 मकान बने हैं। इनमें 157 परिवार रहते हैं। कुल लोगों की संख्या 750 है। पीठ ने कहा कि सरकार चाहे तो जरूरतमंद लोगों को सहानुभूति राशि दे सकती है।

1980 में अधिग्रहित कर ली गई थी जमीन

यहां के निवासियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में सरकार की तरफ से मकान खाली करने के नोटिस को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में इन मकान मालिकों से दस्तावेज मांगे तो पता चला कि किसी के पास वास्तविक दस्तावेज नहीं हैं। डीडीए ने बताया कि यह जमीन वर्ष 1980 में अधिग्रहित कर ली गई थी। इसके बाद कई मास्टर प्लान आए, जिसके तहत इस जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाना था, लेकिन लोगों ने सड़क के साथ ही लगे नाले तक पर अवैध निर्माण कर डाला।

‘केवल दस मीटर से कब्जा हटवा रहे’

शालीमार बाग गांव की यह सड़क हैदरपुर गांव को जोड़ती है। इसके पास रेलवे लाइन है। सरकार की तरफ से अधिवक्ता धीरज सिंह ने उच्च न्यायालय को बताया गया कि सरकार ने लचीला रवैया अपनाया है। तभी महज साढ़े दस मीटर जमीन से अवैध कब्जे हटाकर सड़क को निर्धारित नियम के अनुसार 30 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। अन्यथा वास्तविक रूप में 24 मीटर जमीन पर अवैध कब्जा है। यदि सारा हटाया जाता है तो हजारों परिवार बेघर हो जाएंगे।

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इस सड़क के नजदीक प्रस्तावित योजना

1. मिनी सचिवालय यहां बनाया जाना है। इसका कार्य जल्द शुरू किया जाएगा

2. दो शॉपिंग मॉल की जगह चिह्नित कर ली गई हैं। नक्शा भी पास हो गया है

3. शालीमार प्लेस (यह भारत मंडपम की तर्ज पर तैयार किया जाएगा)। यहां पर बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा

जमीन के बदले जमीन या आज के रेट के हिसाब से मुआवजा मिले

राम कुमार, पीड़ित, ''35 वर्षों से अपने परिवार के साथ रह रहा हूं। मेरे परिवार में 16 लोग हैं। मेरा 50 गज का मकान है। सरकार हमें जमीन के बदले जमीन या आज के रेट के हिसाब से मुआवजा दे।''

नसरूद्दीन, पीड़ित, ''मकानों पर पीले पेंट से चिन्हित कर क्रॉस का निशान बनाया। तब से ही मकान छीनने का डर सता रहा है। मकान से जुड़े कागज हैं फिर भी मकान को नष्ट किया जा रहा है।''

कमला देवी, पीड़ित, "हमारे आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज दिल्ली के हैं। गांव में इस मकान के अलावा कहीं सिर छिपाने का स्थान नहीं है। अब यह हमसे छिनने वाला है।''

उर्मिला, पीड़ित, ''हमारा यहां पर 12 गज का मकान है। जब से मकान पर पीला निशान लगाया गया है। तब से घर छीनने के डर से परिवार के सदस्य कामकाज पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।''

राम किशोर, पीड़ित, ''मैं 1978 से यहां पर अपने परिवार के साथ रह रहा हूं। बिजली-पानी के कनेक्शन होने के बाद भी हमारे मकानों को तोड़ा जाएगा। मुआवजा तक की बात नहीं की जा रही है।''

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