दिल्ली मेट्रो में किया मास्टरबेट, महिला का हैरेसमेंट; कोर्ट ने बरकरार रखी सजा, क्या कहा?
दिल्ली की एक अदालत ने मेट्रो में महिला के साथ यौन उत्पीड़न करने के दोषी की सजा बरकरार रखी है। साकेत और हौज खास के बीच हुई इस घटना में आरोपी ने अश्लील हरकत की थी।

दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने मेट्रो ट्रेन के अंदर एक महिला के साथ सेक्शुअल हैरेसमेंट करने के लिए एक दोषी की सजा को बरकरार रखा है। एडिशनल सेशंस जज हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी की अदालत ने मोहम्मद ताहिर की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी सजा को चुनौती दी थी। अदालत ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आने-जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा पक्का करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया है।
निचली अदालत का फैसला बरकरार
मोहम्मद ताहिर को पुराने इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 354 (महिला की इज्जत खराब करने के इरादे से हमला) और 354A (सेक्शुअल हैरेसमेंट) के तहत सजा सुनाई गई थी। एडिशनल सेशंस जज हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी की अदालत ने 24 मई, 2025 की सजा के फैसले और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट-क्लास छाया त्यागी के 6 अक्टूबर, 2025 के सजा के आदेश को बरकरार रखा।
दोषी की अपील में कोई दम नहीं
अदालत ने 9 मार्च के अपने आदेश में कहा कि प्रॉसिक्यूशन ने ट्रायल कोर्ट के सामने बिना किसी शक के आरोपी के गुनाह को साबित कर दिया है। अदालत का मानना है कि ट्रायल कोर्ट के दिए गए फैसले में कोई गड़बड़ी नहीं है। दोषी मोहम्मद ताहिर की अपील में कोई दम नहीं है।
महिला के बगल में किया मास्टरबेट
बता दें कि यह घटना 27 मार्च, 2021 की शाम को येलो लाइन पर दिल्ली मेट्रो ट्रेन में साकेत और हौज खास स्टेशनों के बीच हुई थी। मोहम्मद ताहिर ने कथित तौर पर शिकायत करने वाली महिला के बगल में खड़े होकर मास्टरबेट किया था। यही नहीं जब पीड़िता ने उसका विरोध किया तो आरोपी ने उसके कंधे पर हाथ फेरा था। इसके बाद महिला ने शोर मचाया तो यात्रियों ने आरोपी को ट्रेन से भगा दिया था।
आरोपी ने क्या दी दलीलें?
आरोपी के वकील ने दलील दी कि शिकायत करने वाली महिला की गवाही भरोसे लायक नहीं है। उसने 31 मार्च, 2021 को मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने बयान दिया कि वह आरोपी के साथ INA मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन से उतरी थी। इसके बाद 4 दिसंबर, 2023 को गवाही में कहा था कि वह ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन से उतरी थी। अदालत ने आरोपी की इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बचाव पक्ष की गुमराह करने वाली दलील है।
एडिशनल सेशंस जज हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने अपील खारिज करते हुए कहा कि इस कोर्ट को लगता है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पीड़िता की गवाही के सीधे सबूत पर आधारित है। इसे दूसरे गवाहों ने भी साबित किया है। इसमें वे सबूत भी शामिल हैं जिसमें इमरजेंसी बटन दबाना, अधिकारियों का पहुंचना और ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन पर कंट्रोलर रूम में आरोपी की गिरफ्तारी शामिल थी।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा पर दिया आदेश
इसके साथ ही अदालत ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आने-जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा पक्का करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा पक्का करना राज्य का कर्तव्य है। यह मामला पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा चिंताओं को दिखाता है। भीड़भाड़ वाली मेट्रो जैसी पब्लिक जगह पर महिलाओं के खिलाफ अपराध न केवल शारीरिक वरन गहरा साइकोलॉजिकल ट्रॉमा भी देते हैं।




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