अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन सिद्दीकी को बड़ी राहत, मेडिकल आधार पर मिली दो हफ्ते की अंतरिम जमानत
पिछले साल नवंबर में लाल किला के पास बम धमाके के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम चर्चा में आया था। सिद्दीकी को उनके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में एनरोल्ड स्टूडेंट्स के साथ धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में आतंक का ठिकाना साबित हुई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को शनिवार को उस वक्त बड़ी राहत मिल गई, जब दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी। उन्होंने अपनी पत्नी के खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत के लिए अर्जी दी थी। जिसमें उन्होंने अदालत को बताया था कि उनकी पत्नी मेटास्टैटिक ओवेरियन कैंसर से जूझ रही हैं और उनका इलाज दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में चल रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि जल्द ही उनकी पत्नी की कीमोथैरेपी होना है। इसी आधार पर साकेत कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने सुनवाई के बाद उन्हें दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी।
ईडी ने किया जमानत का विरोध
जमानत अर्जी में जवाद अहमद सिद्दीकी ने कहा कि उनके तीन बच्चे संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं। पढ़ाई और परीक्षा के कारण उनका विदेश से भारत आना मुश्किल है। ऐसे में उनकी बीमार पत्नी की देखभाल में भारी दिक्कत आ रही है। वहीं, ईडी ने जमानत के विरोध में कहा कि जवाद अहमद सिद्दीकी की पत्नी की हालत स्थिर है और उनका इलाज 2024 से चल रहा है। परिवार के अन्य सदस्य और बच्चे भी विदेश से आकर सहायता कर सकते हैं। एजेंसी ने तर्क दिया कि अगर सिद्दीकी को रिहा किया जाता है तो जांच में बाधा पहुंचाने के अलावा वह गवाहों को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही यह भी कहा कि सिद्दीकी के खिलाफ आरोपों में गंभीर आर्थिक अपराध और बड़ी रकम की मनी लॉन्ड्रिंग भी शामिल है।
अदालत ने यह कहते हुए दी जमानत
ईडी के पुरजोर विरोध के बावजूद कोर्ट ने जवाद सिद्दीकी को राहत दे दी, साथ ही कहा कि रिकॉर्ड में रखे गए मेडिकल डॉक्यूमेंट्स से साफ पता चलता है कि उनकी पत्नी की कीमोथैरेपी चल रही है और उन्हें देखभाल और सपोर्ट की जरूरत है, खासकर इसलिए क्योंकि वह अकेली रह रही हैं। अदालत ने कहा कि मध्य-पूर्व के देशों में जंग के हालात की वजह से आरोपी के बच्चों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे उनकी पत्नी की 12 मार्च को होने वाली कीमोथेरेपी के लिए भारत आएंगे।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की दो FIR के बाद हुई थी ईडी की एंट्री
पिछले साल नवंबर में लाल किला के पास बम धमाके के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम चर्चा में आया था। सिद्दीकी को उनके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में एनरोल्ड स्टूडेंट्स के साथ धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था। अल फलाह ग्रुप में ईडी की जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की तरफ से दर्ज दो FIR के बाद शुरू हुई थी। इनमें आरोप लगाया गया था कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने गैर-कानूनी फायदे के लिए स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को गुमराह करने के लिए नेक एक्रेडिटेशन और यूजीसी से मान्यता होने के बारे में झूठे और गुमराह करने वाले दावे किए गए थे।
बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था और फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की 140 करोड़ रुपए की जमीन और इमारतों को जब्त कर लिया था। ग्रुप के चेयरमैन और चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
रिपोर्ट: मोनी देवी




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