दिल्ली विधानसभा में विशेष सत्र का प्लान, 28 अप्रैल को होगा आयोजित; क्या है वजह
दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र मंगलवार को आयोजित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र मंगलवार को आयोजित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा। फिलहाल सत्र एक दिन का रहने की संभावना है। हालांकि, इसे आगे के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। भाजपा ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है और कई भाजपा शासित राज्यों ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए इसी तरह के विशेष विधानसभा सत्र बुलाए हैं।
दिल्ली विधानसभा सचिवालय के एक बयान में कहा गया है कि आठवीं विधानसभा का पांचवां सत्र मंगलवार को सुबह 11 बजे शुरू होगा। अधिकारियों ने बताया कि महिला आरक्षण मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सत्र एक दिन का होगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
इससे पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता संसद में नारी शक्ति संशोधन विधेयक पारित न होने के विरोध में एक सम्मेलन में काली पट्टी बांधकर पहुंचीं थीं। उन्होंने इसे 'दुखद' घटनाक्रम बताते हुए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने 'कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (सीएआईटी) द्वारा आयोजित महिला उद्यमी शिखर सम्मेलन में कहा कि प्रत्येक महिला अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में विपक्षी दलों के 'महिला-विरोधी' रुख को उठाएगी। मुख्यमंत्री ने शिखर सम्मेलन में महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में नारे भी लगाए।
विपक्ष पर जोरदार हमला
रेखा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, विपक्ष ने ठान लिया था कि किसी भी कीमत पर हम महिलाओं को लोकसभा तक नहीं पहुंचने देंगे। सच्चाई यह है कि उन्हें सिर्फ अपने परिवार की महिलाओं की चिंता है, देश की 70 करोड़ महिलाओं की नहीं।
उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर राजनीति करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, वे नहीं चाहते कि देश की आधी आबादी संसद तक पहुंचे। विपक्ष के महिला विरोधी रुख पर उनके निर्वाचन क्षेत्रों की हर महिला सवाल उठाएगी। उन्होंने कहा, 1971 में देश की आबादी करीब 50 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 140 करोड़ हो गई है। उस हिसाब से सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए लेकिन आपको (विपक्ष को) समस्या इसलिए थी, क्योंकि आप अपनी मौजूदा सीटों का विभाजन नहीं चाहते थे और न ही किसी महिला को आगे आने देना चाहते थे।
'राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि गरिमा और संवेदनशीलता का सवाल'
मुख्यमंत्री ने कहा, जब हम भारत की तुलना बड़े देशों से करते हैं, तो विपक्ष को यह भी देखना चाहिए कि वहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 50 प्रतिशत है और कुछ देशों में इससे भी ज्यादा है। मुख्यमंत्री ने कहा, एक महिला मुख्यमंत्री के तौर पर, यह महज राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि गरिमा और संवेदनशीलता का सवाल है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों महिलाओं को फैसला लेने में भूमिका देने का एक महत्वपूर्ण अवसर छीन लिया गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला सशक्तीकरण में बाधा डाली है। रेखा गुप्ता ने कहा, महिलाएं सब कुछ देख और समझ रही हैं। इस अन्याय का जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश बदल चुका है और महिलाएं अब अपने अधिकारों का दावा करेंगी।
भाषा से इनपुट




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