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ब्लू व्हेल से लेकर कोरियन लवर तक... पहले भी जानलेवा बन चुके हैं ऑनलाइन चैलेंज

गाजियाबाद की घटना ने एक बार फिर जानलेवा ऑनलाइन गेम्स की यादें ताजा कर दी हैं। ब्लू व्हेल, मोमो और चोकिंग गेम जैसे चैलेंजेस ने दुनियाभर में तबाही मचाई है, जिसके बाद अब कई देश मोबाइल और सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगा रहे हैं।

Thu, 5 Feb 2026 06:38 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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ब्लू व्हेल से लेकर कोरियन लवर तक... पहले भी जानलेवा बन चुके हैं ऑनलाइन चैलेंज

गाजियाबाद में तीन लड़कियों की आत्महत्या मामले में कोरियन लवर गेम नाम का गेमिंग ऐप चर्चा में है। यह पहली बार नहीं है, जब ऑनलाइन गेम्स देश में जानलेवा बने हैं। कुछ खतरनाक ऑनलाइन गेम्स और चैलेंजेस पर एक नजर।

पबजी

पबजी का पीसी वर्जन सबसे पहले मार्च 2017 में आया था। इसके बाद भारत में मोबाइल वर्जन में लहर 2018 में आई। हिंसक व्यवहार और सुरक्षा कारणों से भारत सरकार ने सितंबर 2020 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह कोई सुसाइड गेम नहीं है, लेकिन इसकी अत्यधिक लत के कारण भारत में हिंसा, चोरी और अवसाद के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए। पिछले साल यूपी के लखनऊ में एक लड़के ने गेम खेलने से रोकने पर अपनी मां की हत्या कर दी थी।

ब्लू व्हेल

यह भारत में डिजिटल मौत का सबसे खौफनाक चेहरा था। रूस से शुरू हुआ यह गेम 2017 में चर्चा में आया। इसमें 50 दिनों तक 50 टास्क दिए जाते थे। शुरुआत छोटे काम से होती थी और अंत में ऊंची इमारत से कूदने का टास्क मिलता था। पहला मामला मुंबई में आया था। इसके बाद बंगाल और केरल जैसे राज्यों में 10 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, रूस और मध्य एशियाई देशों में 130 से अधिक किशोरों की आत्महत्याओं के तार इस गेम से जुड़े पाए गए थे।

मोमो चैलेंज

ब्लू व्हेल के बाद वर्ष 2018 में मोमो एक डरावने चेहरे के साथ व्हाट्सऐप पर वायरल हुआ। इसमें एक अज्ञात नंबर से बच्चों को चुनौती दी जाती थी। टास्क पूरा न करने पर उन्हें डराया और ब्लैकमेल किया जाता था। इसका असर भारत में देखने को मिला। राजस्थान और ओडिशा में इसके संदिग्ध मामले सामने आए थे, जिसके बाद पुलिस ने देशव्यापी एडवाइजरी जारी की थी।

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चोकिंग गेम

यह गेम 1990 के दशक से शारीरिक रूप से मौजूद था, लेकिन इंटरनेट पर यह 2008-2010 के आसपास वीडियो के जरिए फैला। वर्ष 2020-21 में गेम ब्लैकआउट चैलेंज के नाम से टिकटॉक पर घातक बनकर उभरा। इसमें बच्चों को अपनी सांस तब तक रोकने को कहा जाता था, जब तक वे बेहोश न हो जाएं। इससे अमेरिका, इटली, ब्रिटेन समेत कई देशों में 2021 में दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थीं।

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इन देशों ने लागू किया प्रतिबंध

  • ऑस्ट्रेलिया: 10 दिसंबर, 2025 को मिनिमम ऐज फॉर सोशल मीडिया कानून पास किया। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही जुर्माना भी 270 करोड़ रुपये का लगाने की बात कही है।
  • ब्रिटेन: वर्ष 2024 के अंत में अपनी नीतियों को सख्त किया और जनवरी 2026 से इन्हें अनिवार्य रूप से लागू करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन के शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे स्कूल के पूरे दिन (ब्रेक और लंच टाइम सहित) मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएं।यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की लगभग 40 फीसदी शिक्षा प्रणालियों (79 से अधिक देशों) ने स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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