गुरुग्राम-सोहना हाईवे की दो लेन में भी आई दरार, जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे लोग
गुरुग्राम-सोहना हाईवे की एक लेन सेक्टर-47 स्थित रहेजा मॉल के पास धंसने के बाद बची दो लेन में भी अब दरार आ गई है। यह दरार आधे से एक सेंटीमीटर चौड़ी है। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित होने की संभावना बन गई है।

गुरुग्राम-सोहना हाईवे की एक लेन सेक्टर-47 स्थित रहेजा मॉल के पास धंसने के बाद बची दो लेन में भी अब दरार आ गई है। यह दरार आधे से एक सेंटीमीटर चौड़ी है। मौजूदा समय में हाईवे की इन दोनों लेन पर वाहन दौड़ रहे हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित होने की संभावना बन गई है।
सीवर लेन की वजह से बुधवार दोपहर करीब साढ़े 3 बजे गुरुग्राम-सोहना हाईवे की एक लेन धंस गई थी। करीब 10 फीट चौड़ा गड्ढा हो गया था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा इस हिस्से की अस्थायी बैरिकेडिंग कर दी दई थी। गुरुवार दोपहर को हिन्दुस्तान टीम ने मौके पर निरीक्षण किया। इस दौरान देखा गया कि धंसे हिस्से के साथ इस हाईवे की बची दो लेन में एक मोटी दरार आ गई है। इस हाईवे पर एक घंटे में करीब तीन से चार हजार वाहन दौड़ रहे हैं।
एनएचएआई ने धंसे हिस्से की मरम्मत का काम शुरू नहीं किया
एनएचएआई ने शुक्रवार को इस धंसे हिस्से की मरम्मत का काम शुरू नहीं किया है। दोपहर बाद बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि एनएचएआई या जीएमडीए के किसी वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से भी मौके का निरीक्षण नहीं किया गया था। एचएसवीपी के एक रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि इस सीवर लाइन में मौजूदा समय में भी गंदा पानी चल रहा है। अभी इसे डायवर्ट नहीं किया गया है। इस कारण गुरुवार को धंसे हिस्से की चौड़ाई बढ़कर करीब 20 फीट हो गई। सड़क के करीब 20 फीट नीचे से यह सीवर लाइन निकल रही है। इस सीवर लाइन से सेक्टर-45 से लेकर सेक्टर-51 तक का गंदा पानी बहरामपुर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचता है। करीब 30 साल पहले यहां सीवर लाइन डाली गई थी, जो अब खराब हो चुकी है।
पौने चार साल में छठी बार धंसा
बता दें कि, पिछले पौने चार साल में यह हाईवे गुरुवार को छठी बार धंसा है। पिछले साल 18 जून को यह हाईवे धंसा था।
अभिनव वर्मा, कार्यकारी अभियंता, जीएमडीए, ''यह सीवर लाइन जीएमडीए के अधीन है। इसकी मरम्मत एनएचएआई को करवानी है। 30 साल पहले यह सीवर लाइन डाली गई थी। अभी इसकी स्तिथि ठीक नहीं है। मरम्मत कराने को कहा गया है।''
योगेश तिलक, परियोजना अधिकारी, एनएचएआई, ''जीएमडीए से आग्रह किया है कि गंदे पानी को अतिशीघ्र डायवर्ट किया जाए। पानी के चलते मरम्मत नहीं कर सकी है। पानी डायवर्ट होने के बाद धंसे हिस्से की मरम्मत कर दी जाएगी।''




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