क्यों किया हमारा X अकाउंट ब्लॉक? दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी, अर्जी में और क्या
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया था।

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पार्टी का आधिकारिक ट्विटर अकउंट ब्लॉक किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक कर दिया था। यह रिट याचिका एनजी लॉ चैंबर्स के वकील नकुल गांधी के जरिए दायर की गई है। इस पर सुनवाई 27 मई को हो सकती है।
याचिका में केंद्र पर तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल आंदोलन को ऑनलाइन बहुत ज्यादा समर्थन मिला है। लगभग 10 लाख लोगों ने इस व्यंगपूर्ण प्लेटफॉर्म के सदस्य के तौर पर अपने आप को शामिल किया है, जो खासकर मिलेनियल्स व जेन जी उपयोगकर्ताओं के बीच अपने मीम-ड्रिवन राजनीतिक व्यंग के लिए लोकप्रिय हुआ है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी के लगभग छह लाख सदस्य ने कथित नीट यूजी पेपर लीक विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आंदोलन से जुड़े अकाउंट्स को खास तौर पर निशाना बनाने का भी आरोप लगाया है। याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय से कानूनी दखल की मांग की गई है।
अभिजीत दिपेक के क्या आरोप?
दिपके के मुताबिक कॉकरोच जनता पार्टी का आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है, जिससे पेज का एक्सेस चला गया। अपने निजी एक्स हैंडल से साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने आगे दावा किया कि उनके निजी इंस्टाग्राम अकाउंट के साथ भी छेड़छाड़ की गई है। जबकि पार्टी के एक्स अकाउंट को रोक दिया गया है। उसका बैकअप अकाउंट हटा दिया गया है। डिपके ने लिखा है कि यह कॉकरोच जनता पार्टी पर कार्रवाई जैस है। इंस्टाग्राम पेज हैक कर लिया गया है। दिपके ने यह भी दावा किया कि पार्टी की प्रतिष्ठित वेबसाइट हटा दी गई है।
इससे पहले दीपके ने बताया था , कॉकरोच जनता पार्टी के 'एक्स' पर 2,01,000 फॉलोअर थे। यह पार्टी भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की उस टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई थी जिसमें उन्होंने वरिष्ठता की मांग कर रहे एक वकील से नाराजगी जताते हुए परजीवी और कॉकरोच जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सीजेआई ने बाद में सफाई दी थी कि कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनकी टिप्पणी विशेष रूप से उन लोगों पर थी जो फर्जी डिग्रियों के जरिए वकालत के पेशे में आते हैं।
जस्टिस सूर्यकांत ने 15 मई को ये टिप्पणी की थी और इसके एक दिन बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' सामने आई। यह तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसे नेताओं, कार्यकर्ताओं, कलाकारों और बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिलने लगा।
सरकार पर लगाया बढ़ती लोकप्रियता से डरने का आरोप
दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी को व्यंग्यात्मक मंच बताते हुए 'एक्स' अकाउंट पर रोक लगाने की कार्रवाई पर सवाल उठाया था और कहा था कि अकाउंट और यह आंदोलन तेजी से बढ़ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि, एक्स हैंडल और आंदोलन बढ़ रहा है, हर दिन हजारों फॉलोअर जुड़ रहे हैं। शायद इससे सरकार डर गई है।
इससे इतने भावुक न हों- सुप्रीम कोर्ट
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फर्जी वकीलों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ी गतिविधियों के आरोपों की जांच के अनुरोध वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इसके लिए इतना भावुक न हों। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी से कहा कि वह इस मुद्दे को इतने भावुक तरीकें से नहीं लें। गोस्वामी ने कहा कि सीजेआई की सफाई के बावजूद झूठी और मनगढ़ंत बातें फैलाई जा रही हैं। सीजेआई ने कहा, इससे इतने भावुक न हों।
एक अन्य वकील ने कानून की फर्जी डिग्रियों के मामले में सीबीआई से जांच का अनुरोध करते हुए कहा कि अदालत में हुई बातचीत का कमाई के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सीजेआई ने इसके जवाब में कहा, ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम देखेंगे।




साइन इन