दिल्ली में गायों को प्राकृतिक माहौल देने रेखा सरकार की धांसू योजना, यमुना को भी गोबर के प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति
आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने गौ सेवा को केवल परंपरा ना मानते हुए, उसे समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी बताया, साथ ही कहा कि इसके लिए सभी को मिलकर कोशिशें करना चाहिए।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में सड़कों पर बेसहारा घूम रही गायों के संरक्षण और गौशालाओं की स्थिति सुधारने के लिए एक 'साइंटिफिक प्लान' का खुलासा किया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को उत्तर दिल्ली के किशनगंज गौशाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि सरकार अब गौशालाओं को दिल्ली के 'रिज जंगल' से जोड़ने पर काम कर रही है, ताकि गायों को उचित देखभाल व प्राकृतिक वातावरण मिल सके।
सीएम ने बताया कि ऐसा करने से ना केवल गायों को पेड़-पौधों का नैसर्गिक परिवेश मिल जाएगा, बल्कि गायों के हटने से सड़कों पर यातायात के लिए ज्यादा जगह भी मिल सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन निकलने वाले 1,500 टन गाय के गोबर को यमुना में जाने से बचाने व उसके उचित प्रबंधन के लिए सरकार 6 बायोगैस प्लांट लगाने की योजना बना रही है।
सीएम ने बताया योजना का मुख्य उद्देश्य
उत्तरी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि गौशालाओं को रिज वनक्षेत्र से जोड़ने की योजना का मुख्य उद्देश्य गायों को सड़कों से हटाकर उन्हें प्राकृतिक परिवेश में रखना है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस योजना के तहत गौशालाएं स्थापित करने के लिए शहर भर के 13 जिलों में भूमि की पहचान भी कर ली है। इनमें से प्रत्येक गौशाला में बायोगैस संयंत्र, सौर ऊर्जा संयंत्र और पशु चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
5 एकड़ से ज्यादा बड़ी जमीन पर शिफ्ट होगी गौशाला
इस दौरान गुप्ता ने घोषणा करते हुए बताया कि किशनगंज गौशाला जो कि वर्तमान में एक एकड़ में फैली है और जहां 2000 गायें भी रहती हैं, को जल्द ही जिले के किसी बड़े स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई गौशाला 5 एकड़ से ज्यादा बड़ी जमीन पर फैली होगी और उसे जिले में चिन्हित स्थानों में से किसी एक पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम गौशालाओं को रिज के वन क्षेत्रों से जोड़ने के लिए एक वैज्ञानिक योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि गायें प्राकृतिक और खुले वातावरण में स्वतंत्र रूप से रह सकेंगी।'
सीएम बोलीं अबतक आवंटित कर चुके 44 करोड़ रुपए
मुख्यमंत्री ने गौ कल्याण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और बताया कि पिछले साल भाजपा सरकार बनने के एक सप्ताह के भीतर ही गौशालाओं के बकाया 20 करोड़ रुपए का अनुदान जारी कर दिया था और इस साल भी अतिरिक्त 24 करोड़ रुपए का अनुदान जारी किया गया है। गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में डेयरी कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए मुख्यमंत्री विकास कोष (CMDF) से 100 करोड़ रुपए की राशि भी स्वीकृत की गई है।
गोबर को यमुना में मिलने से रोकने के लिए बताई योजना
गुप्ता ने अपनी सरकार की कई अन्य पहलों की जानकारी देते हुए कहा कि पहले शहर में कोई बायोगैस संयंत्र नहीं था, जिसके कारण गोबर नालियों में बहकर यमुना के पानी में मिल जाता था, लेकिन उनकी सरकार दिल्ली में उत्पन्न होने वाले 1,500 टन गोबर के निपटान के लिए छह बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है।
'गौशाला की शिफ्टिंग तक मिलती रहेंगी सभी सुविधाएं'
कार्यक्रम के दौरान सीएम गुप्ता ने यह भी भरोसा दिलाया कि जब तक नई गौशालाएं बनकर तैयार नहीं हो जातीं और गौवंश की शिफ्टिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक मौजूदा गौशालाओं में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था करना और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम सरकार करती रहेगी।




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