गाजियाबाद में 2 महीने से लापता था 11 साल का बच्चा, जंगल में मिला कंकाल
गाजियाबाद के मसूरी थानाक्षेत्र के गांव समयपुर कटियारा से करीब दो महीने से लापता 11 वर्षीय बच्चे का कंकाल रविवार देर शाम जंगल में पड़ा मिला। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर बच्चे की शिनाख्त की। परिजनों ने अगवा कर बच्चे की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

गाजियाबाद के मसूरी थानाक्षेत्र के गांव समयपुर कटियारा से करीब दो महीने से लापता 11 वर्षीय बच्चे का कंकाल रविवार देर शाम जंगल में पड़ा मिला। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर बच्चे की शिनाख्त की। परिजनों ने अगवा कर बच्चे की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीमा देवी ने चार नवंबर को मसूरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उनका 11 वर्षीय बेटा लविश तीन नवंबर को घर के बाहर खेल रहा था। दोपहर करीब दो बजे वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। काफी देर तक दिखाई न देने पर खोजबीन शुरू की गई। सीमा के मुताबिक सभी संभावित स्थानों पर तलाश करने के बाद भी बेटे का कुछ पता नहीं चला। थक-हारकर उन्होंने मसूरी थाने में शिकायत दी।
नूरपुर-चितौड़ा के जंगल में मिला कंकाल, कपड़ों से पहचान
पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर बच्चे की तलाश शुरू कर दी थी। काफी प्रयास के बाद भी बच्चे का कोई सुराग नहीं लग सका। वहीं, 28 दिसंबर की देर शाम नूरपुर-चितौड़ा के जंगल में एक बच्चे का कंकाल पड़ा मिलने से सनसनी फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर मसूरी पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की। सीमा ने गुमशुदगी दर्ज कराते समय बताया था कि लापता होने के दौरान लविश ने नीले रंग की टी-शर्ट और हाफ पेंट पहनी हुई थी। उधर, कंकाल में भी टी-शर्ट उलझी हुई थी, जिसके चलते पुलिस ने लविश के परिजनों को सूचना दी। लविश की मां सीमा और बड़े भाई सागर ने कपड़ों के आधार पर पहचान लविश के रूप में की। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
फोरेंसिक टीम ने जांच की
दो महीने से लापता बच्चे का शव मिलने का पता लगने पर डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी मौके पर पहुंचे और जानकारी ली। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल सील कर दिया और फोरेंसिक टीम बुला ली। टीम ने हड्डियों, कपड़ों और आसपास की मिट्टी के नमूने एकत्र कर जांच की प्रक्रिया शुरू की। इसके अलावा घटनास्थल के नजदीक मौजूद पेड़-पौधों और झाड़ियों से लेकर रास्तों तक की बारीकी से पड़ताल की गई और आसपास के रास्तों, खेतों के बीच मौजूद संभावित आवाजाही के मार्गों की भी जांच की गई।
संवेदनशील मामला है, सभी पहलुओं पर होगी जांच
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि लापता बच्चे का शव जंगल में मिलना संवेदनशील मामला है। घटना के खुलासे के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच के निर्देश दिए गए हैं। हर साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से परखा जा रहा है। संदिग्ध लोगों के बयान और आसपास के गांव के लोगों की गतिविधियों को जोड़कर जांच की रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
लविश दो भाई और चार बहनों में सबसे छोटा था। सबसे छोटा होने के कारण वह घर में सबका लाडला था। बड़ा भाई सागर और मां मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिजनों ने अपहरण के बाद लविश की हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामले के खुलासे की मांग की। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट होगी।




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