JNU में निकली चेतावनी रैली, ब्राह्मण विरोधी नारों से गूंजा कैंपस; मोदी से लेकर BJP और RSS तक निशाना
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के कार्यकर्ताओं ने रविवार रात अपनी मांगों को लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर चेतावनी रैली निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एक बार फिर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, ठाकुरवाद मुर्दाबाद और हिन्दू राष्ट्र मुर्दाबाद जैसे आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के कार्यकर्ताओं ने रविवार रात अपनी मांगों को लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर चेतावनी रैली निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एक बार फिर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, ठाकुरवाद मुर्दाबाद और हिन्दू राष्ट्र मुर्दाबाद जैसे आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा, आरएसएस, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ भी नारे लगाए।
इस प्रदर्शन में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की गाइडलाइंस को लागू करने और स्टूडेंट्स के रस्टिकेशन ऑर्डर को रद्द करने जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया। छात्र एडमिनिस्ट्रेशन की नीतियों को लेकर अपनी चिंताओं की ओर ध्यान खींचने के लिए इकट्ठा हुए थे।
इससे पहले, हाल के सालों में सबसे सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई में से एक में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा और वाइस प्रेसिडेंट गोपिका के बाबू समेत जेएनयूएसयू के सभी चार ऑफिस-बेयरर्स को एक प्रोटेस्ट के दौरान यूनिवर्सिटी की प्रॉपर्टी में कथित तौर पर तोड़फोड़ करने के लिए दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट कर दिया था।
जेएनयूएसयू के जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली और जेएनयूएसयू के पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार को भी डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगी फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को कथित तौर पर नष्ट करने के लिए रस्टिकेट कर दिया गया है। छात्रों को पूरे जेएनयू कैंपस से तुरंत बाहर कर दिया गया था।
जेएनयूएसयू ने एक बयान में यूनिवर्सिटी के एक्शन की निंदा की और इसे यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को सस्पेंड करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश बताया।
नीतीश कुमार के खिलाफ जारी एक ऑर्डर के मुताबिक, जेएनयूएसयू के पूर्व प्रेसिडेंट को 21 नवंबर, 2025 को डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से लगाए गए फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT)-बेस्ड एक्सेस गेट को नष्ट करने का दोषी पाया गया। यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने नीतीश कुमार पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
गौरतलब है कि छात्रसंघ के पदाधिकारियों समेत पांच छात्रों को "गलत तरीके से निकाले जाने" और उन पर भारी जुर्माना लगाने के विरोध में बीती 11 फरवरी को जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के छात्र हड़ताल पर चले गए थे। जेएनयू ने 2 फरवरी को जेएनयूएसयू के चार पदाधिकारियों और स्टूडेंट बॉडी के एक पूर्व अध्यक्ष को निकालने का आदेश जारी किया था। यह कार्रवाई एक प्रॉक्टोरियल जांच के बाद की गई थी, जिसमें उन्हें 21 नवंबर, 2025 को डॉ. बी. आर. अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी की प्रॉपर्टी को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
जेएनयू प्रशासन के आदेश के खिलाफ कई लेफ्ट-एसोसिएटेड स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ने तब से प्रभावित ऑफिस बेयरर्स के साथ एकजुटता दिखाई है। हाल ही में हुई SSS काउंसिल की एक जनरल बॉडी मीटिंग में पास किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि छात्र क्लास का बॉयकॉट करेंगे, स्ट्राइक करेंगे और अपना प्रोटेस्ट और तेज करते रहेंगे।
(पीटीआई के इनपुट के साथ)




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