गुरुग्राम में सड़क पर खुले गड्ढे में गिरी कार, 25 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती रहीं महिला प्रोफेसर
गुरुग्राम के सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। ग्लेरिया रोड किनारे बिना किसी चेतावनी बोर्ड के छोड़े गए गड्ढे में महिला प्रोफेसर की कार गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह करीब 25 मिनट तक कार के अंदर मौत और जिंदगी के बीच जूझती रहीं। गनीमत रही कि वह इस हादसे में बाल-बाल बच गई।

गुरुग्राम के सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। ग्लेरिया रोड किनारे बिना किसी चेतावनी बोर्ड के छोड़े गए गड्ढे में महिला प्रोफेसर की कार गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह करीब 25 मिनट तक कार के अंदर मौत और जिंदगी के बीच जूझती रहीं। गनीमत रही कि वह इस हादसे में बाल-बाल बच गई।
यह घटना शनिवार शाम करीब सवा पांच बजे सुशांत लोक-1 में घटी। रिजवुड एस्टेट सोसाइटी की निवासी और पेशे से प्रोफेसर चित्रा कौल एक निजी यूनिवर्सिटी में कार्यरत है। उन्होंने बताया कि कार में सवार होकर शनिवार शाम को यूनिवर्सिटी से घर लौट रही थीं। ग्लेरिया रोड पर पहुंची तो सड़क किनारे मिट्टी का ढेर लगा हुआ था। दूर से देखने पर यह आभास हो रहा था कि यह सड़क का ही हिस्सा है या शायद मामूली मरम्मत का काम चल रहा है।
जैसे ही प्रोफेसर कौल ने ट्रैफिक के बीच अपनी कार को थोड़ा किनारे से निकालने की कोशिश की, उनकी कार अचानक हवा में लहराई और सीधे एक गहरे गड्ढे में पलट कर जा गिरी। सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरा घटनाक्रम कैद हो गया।
मिट्टी के उस ढेर के ठीक पीछे एक विशालकाय गड्ढा था, जिसे ढकने या बैरिकेड करने की जहमत निर्माण एजेंसी ने नहीं उठाई थी। हादसा इतना भीषण था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह गड्ढे में धंस गया। प्रोफेसर कौल कार के भीतर ही फंस गईं। गाड़ी के दरवाजे जाम हो गए थे और वह बाहर निकलने में पूरी तरह असमर्थ थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह करीब 25 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती रहीं। मौके पर मौजूद स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। जब दरवाजे नहीं खुले, तो कार का पिछला शीशा तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
क्रेन की मदद से गड्ढे से कार बाहर निकालीं
हादसे की सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त कार को गड्ढे से बाहर निकाला गया। प्रोफेसर कौल इस घटना से सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि यह उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव था। इस हादसे ने गुरुग्राम के शहरी नियोजन और रखरखाव एजेंसियों की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।
आनन-फानन में भरवाया
हैरानी की बात यह है कि जैसे ही हादसा हुआ और पुलिस की दखलअंदाजी बढ़ी, प्रशासन और निर्माण एजेंसी अचानक सक्रिय हो गए। जिस गड्ढे को हफ्तों से खुला छोड़ा गया था, उसे रात के अंधेरे में आनन-फानन में मिट्टी डालकर भर दिया गया। स्थानीय निवासियों ने इसे लीपापोती की कार्रवाई करार दिया है।
काफी दिन से खुला था
ग्लेरिया रोड जैसे व्यस्त इलाके में भी स्ट्रीट लाइट्स की स्थिति खराब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही यहां का अंधेरा इन गड्ढों को मौत का जाल बना देता है। निवासियों का आरोप है कि यह गड्ढा काफी दिनों से खुला था। बार-बार शिकायत के बावजूद निर्माण एजेंसी ने इसे भरने के लिए कोई कदम नहीं उठाए।
हत्या की कोशिश जैसी लापरवाही
प्रोफेसर चित्रा कौल ने इस मामले में पुलिस को प्राथमिक सूचना दे दी है और वह निर्माण एजेंसी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा की गई हत्या की कोशिश जैसी लापरवाही है। आज मेरी कार गिरी है, कल कोई बाइक सवार या पैदल चलने वाला बच्चा इसमें गिरकर अपनी जान गंवा सकता था।




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