नोएडा की तरह दिल्ली-गुरुग्राम तक बवाल की थी साजिश, हिंसा में 8 लड़कियों के भी हाथ!
नोएडा में पिछले दिनों सैलरी की मांग को लेकर हुए बवाल और हिंसा के पीछे एक बड़ी साजिश काम कर रही थी। पुलिस की जांच में अभी तक कई किरदार सामने आ चुके हैं। अब कुछ लड़कियों की भी पुलिस को तलाश है।

नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के समय इंजीनियर और साजिशकर्ता आदित्य आनंद की कई महिला साथी भी मौके पर मौजूद थीं। उन पर भी श्रमिकों को आगजनी और तोड़फोड़ के लिए उकसाने का आरोप है। पुलिस और एसटीएफ ने करीब 8 ऐसी युवतियों को चिह्नित किया है। उनकी तलाश जारी है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि नोएडा की तरह दिल्ली और गुरुग्राम तक बवाल कराने की साजिश रची गई थी।
मजदूर बिगुल दस्ता से युवतियों के संबंध की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि श्रमिक हिंसा के दौरान पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और कर्नाटक समेत अन्य राज्यों से भी लोग आए। उन्होंने श्रमिकों को भड़काया। मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद के नोएडा स्थित घर में श्रमिक आंदोलन की तैयारी का ब्लू प्रिंट मिला है। पुलिस और एसटीएफ की टीमों ने जब उसके सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार वाले घर की तलाशी ली तो वहां श्रमिक आंदोलन से जुड़े कई दस्तावेज और नोटबुक मिली। कई इलेक्ट्रानिक गैजेट भी मिले। पुलिस ने आदित्य के चार साथियों से भी पूछताछ की। दूसरी ओर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने श्रमिक असंतोष के बाद बड़े पैमाने पर अवैध हिरासत का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखा है।
हिमांशु ऐसे आदित्य आनंद के संपर्क में आया
पुलिस ने रविवार को हिमांशु ठाकुर गिरफ्तार किया था। वह मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य और आदित्य आनंद का साथी है। वह आकृति नाम की युवती के संपर्क में आने के बाद संगठन से जुड़ा। आकृति ने उसका संपर्क आदित्य आनंद से कराया था। उसने आदित्य के साथ कई श्रमिक आंदोलनों की जनसभाओं में हिस्सा लिया। उसने घटना के कई वीडियो बनाए और अपलोड भी किए।
दिल्ली-गुरुग्राम में चक्का जाम की कोशिश थी
आदित्य आनंद और हिमांशु समेत अन्य आरोपियों के पास से लैपटॉप और मोबाइल भी बरामद हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि आदित्य और उसके साथी नोएडा में फरवरी में ही आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद अप्रैल की तैयारी की गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि नोएडा के अलावा दिल्ली और गुरुग्राम में भी चक्का जाम की साजिश थी।
लखनऊ से भी तार जुड़े
नोएडा में हुई हिंसा में अब लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार मामले में लखनऊ स्थित एक श्रमिक संगठन भी जांच के घेरे में है। एसटीएफ ने संगठन के संचालक के कई ठिकानों पर छापेमारी की।
एसीपी को हटाया गया
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने सोमवार को डीसीपी सेंट्रल और एसीपी को हटा दिया है। डीसीपी को हटाने के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया जा रहा, लेकिन सूत्र इसे श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के कारण की गई कार्रवाई बता रहे। डीसीपी सेंट्रल नोएडा की जिम्मेदारी एक अप्रैल 2023 को शैव्या गोयल को मिली थी। उन्हीं के कार्यकाल में श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा हुई। वह फिलहाल छुट्टी पर हैं। डीसीपी यातायात शैलेंद्र सिंह को सेंट्रल नोएडा का प्रभारी डीसीपी बनाया गया है। मामले में एसीपी उमेश यादव को भी हटा दिया गया है। उनकी जगह दीक्षा सिंह को जिम्मेदारी दी गई है। डीसीपी के हटने को लेकर जिले की पुलिस की मीडिया सेल ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि शैव्या गोयल के पैर में चोट लग जाने व अवकाश पर जाने के कारण डीसीपी यातायात शैलेंद्र सिंह को प्रभारी डीसीपी बनाया गया है। प्रदर्शन शुरू होने के पहले फेज दो थाना प्रभारी अवधेश कुमार सिंह को हटाया गया था।




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