एम्स में गामा नाइफ सर्जरी के लिए नई एमआरआई मशीन लगेगी
एम्स में गामा नाइफ सेंटर में नई एमआरआई मशीन लगाई जाएगी। यह मशीन गामा नाइफ सर्जरी के लिए जरूरी है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। वर्तमान मशीन पुरानी हो गई है, जिसके कारण समस्याएं आ रही हैं। नई मशीन से आंखों के कैंसर का इलाज भी संभव होगा, विशेषकर बच्चों के लिए।

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। एम्स में गामा नाइफ सेंटर में नई एमआरआई मशीन लगेगी। नई मशीन खरीदने के लिए एम्स ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के आठ से नौ माह में नई मशीन लग जाएगी। इससे एम्स में गामा नाइफ सर्जरी के लिए पहुंचने वाले मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल पाएगी। गामा नाइफ से छोटे ब्रेन ट्यूमर, नस के गुच्छों सहित न्यूरो की कई बीमारियों की बिना कोई चीरा लगाए सर्जरी होती है। इस तकनीक में गामा रेडिएशन बीम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके जरिये ट्यूमर को नष्ट कर दिया जाता है।
महंगी होने के कारण देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही इस तकनीक की सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली में सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों में सिर्फ एम्स में इसकी सुविधा उपलब्ध है। इस वजह से दूसरे राज्यों से भी गामा नाइफ सर्जरी के लिए मरीज रेफर होकर एम्स पहुंचते हैं। इस तकनीक से सर्जरी की प्लानिंग व टारगेटेड सर्जरी के लिए एमआरआई का इस्तेमाल किया जाता है। एमआरआई से ट्यूमर व नस गुच्छों के वास्तविक स्थानों को देखते हुए गामा नाइफ सर्जरी की जाती है।एम्स के गामा नाइफ सेंटर में वर्तमान समय में उपलब्ध एमआरआई मशीन अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। यह एमआरआई मशीन वर्ष 2011 लगी थी। सामान्य तौर पर इसकी उम्र दस वर्ष होती है। वर्तमान मशीन 15 वर्ष पुरानी होने के कारण कई बार समस्याएं आती हैं। इसके मद्देनजर एम्स ने पुरानी मशीन की जगह नई एमआरआई मशीन लगाने की पहल की है। एम्स ने गामा नाइफ सर्जरी से आंखों के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा का भी इलाज शुरू किया है। आंखों के कैंसर से बच्चे अधिक पीड़ित होते हैं। ऐसे में गामा नाइफ सेंटर में नई एमआर मशीन लगने से आंखों के कैंसर से पीड़ित बच्चों को भी फायदा होगा।
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