रिसिन को कोई 'पक्का' एंटिडोट नहीं; यह जहर कितना घातक, क्या लक्षण? एक्सपर्ट व्यू
गुजरात एटीएस ने हैदराबाद निवासी डॉक्टर अहमद मोहीउद्दीन सैयद समेत 3 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से डॉ. मोहीउद्दीन कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल रिसिन नामक घातक जहर बनाने में करने वाला था। जानें कितना खतरनाक है रिसिन जहर...

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने हैदराबाद निवासी डॉक्टर अहमद मोहीउद्दीन सैयद समेत 3 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें दो यूपी के थे। इन पर आरोप था कि ये ‘घातक जहर’ से बड़ा आतंकी हमला करने वाले थे। उनके पास से अत्याधुनिक हथियारों के साथ 4 लीटर कैस्टर ऑयल बरामद किया गया था। जांच में पाया गया कि डॉ. मोहीउद्दीन कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल रिसिन जैसे घातक जहर को तैयार करने में करने वाला था। विशेषज्ञ से जानें कितना खतरनाक है रिसिन जहर...
कोई 'पक्का' एंटिडोट नहीं
दिल्ली एम्स राष्ट्रीय विष सूचना केंद्र के पूर्व प्रमुख डॉ. वाईके गुप्ता ने बताया कि रिसिन बेहद घातक जहर है। इसकी महज 1 मिलीग्राम मात्रा भी खतरनाक साबित हो सकती है। बड़ी बात यह कि रिसिन जहर का कोई 'पक्का' एंटिडोट भी नहीं है। इसे आज भी एक जैविक आतंकवाद का एक कारक माना जाता है। यानी रिसिन पीड़ित का इलाज भी मुश्किल है।
कैसे करता है असर?
रिसिन टेरर वेपन के बारे में डॉ. वाईके गुप्ता ने कहा कि यह जहर त्वचा के माध्यम से भी शरीर में जा सकता है। इसे निगला जा सकता है। यह खतरनाक जहर श्वसन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम समेत बॉडी के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है। रिसिन पीड़ित को उल्टी, दस्त होने लगती है। इसके असर से धीरे-धीरे शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। अंत में मौत हो सकती है।
आपराधिक गतिविधियों में होता रहा है यूज
डॉ. गुप्ता ने बताया कि रिसिन प्रोटीन की प्रकृति वाला एक केमिकल है। रिसीन जहर को खाने या पर्यावरण में मिलाया जा सकता है। यह अरंडी के बीजों में पाया जाता है। अरंडी के बीज जहरीले हो सकते हैं। ये इतने सख्त होते हैं कि निगलने पर टूटते नहीं लेकिन जब टूटते हैं तो जानलेवा हो जाते हैं। 1970 के दशक में आपराधिक गतिविधियों में भी रिसिन का इस्तेमाल किया जाता था।




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