बाबा साहब के संविधान ने दी ताकत; राघव चड्ढा ने बताया डरकर नहीं बल्कि इस वजह से AAP को छोड़ा
चड्ढा ने कहा, 'जो लोग यह कह रहे हैं कि खासतौर पर आम आदमी पार्टी के नेता कि हम लोग डरकर गए हैं, तो हम उन्हें बता दें कि हम डरकर नहीं, निराश होकर गए हैं। हम डरकर नहीं बल्कि चिढ़कर हमने आम आदमी पार्टी को छोड़ा है।'

आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के एक दिन बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एकबार फिर अपनी पूर्व पार्टी पर जमकर हमला बोला और पार्टी के गलत हाथों में चले जाने का आरोप लगाया। चड्ढा का कहना है कि आम आदमी पार्टी अब भ्रष्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड (समझौतावादी) हाथों में चली गई है, इसी वजह से हर ईमानदार और मेहनती व्यक्ति को लगता है कि अब वहां काम करने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह अधिकार उन्हें बाबा साहब आंबेडकर के बनाए संविधान ने दिया है। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी डर की वजह से आम आदमी पार्टी को नहीं छोड़ा है, बल्कि AAP से निराशा, घुटन व घृणा होने की वजह से छोड़ा है।
एएनआई से बात करते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद ने कहा, 'आज हर वो सच्चा देशभक्त आदमी जिसने आम आदमी पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा, और जो बड़ी उम्मीदों के साथ आम आदमी पार्टी से जुड़ा था, आज हर वो व्यक्ति या तो आम आदमी पार्टी को छोड़ चुका है, या छोड़ रहा है। क्योंकि हर ईमानदार व मेहनतकश आदमी को लगता है कि अब आम आदमी पार्टी में काम करने की जगह नहीं बची है और यह पार्टी अब एक ऐसे गलत रास्ते पर चल रही है, जिससे कोई अपना नाता नहीं रखना चाहता। इसी के चलते एक-एक करके तमाम लीडर्स ने आम आदमी पार्टी को छोड़ दिया है।'
'बाबा साहब के संविधान ने हमें यह ताकत दी'
आगे आम आदमी पार्टी को छोड़ भाजपा में जाने पर राघव चड्ढा ने कहा, ‘बाबा साहब आंबेडकर द्वारा बनाया गया संविधान चुने हुए सांसदों को यह ताकत देता है, यह प्रावधान देता है कि यदि उन्हें ऐसा महसूस हो कि उनकी पार्टी करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड हाथों में चली गई है या गलत रास्ते पर चली गई है तो वे अपनी पार्टी को त्याग सकते हैं। अधिकांश सांसद यदि चाहें तो उसके लिए दो तिहाई या दो तिहाई से ज्यादा की लिमिट तय की गई है।’
'यहां तो 7 सांसदों का मानना है कि AAP करप्ट हाथों में है'
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'इस केस में तो एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह नहीं, बल्कि सात सांसद मिलकर आम आदमी पार्टी को मिलकर त्याग रहे हैं, छोड़ रहे हैं, क्योंकि वे लोग यह मानते हैं कि आम आदमी पार्टी करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के हाथ में जा चुकी है।'
'हम डरकर नहीं, बल्कि इस वजह से AAP छोड़कर गए'
आगे उन्होंने कहा, 'और जो लोग यह कह रहे हैं कि खासतौर पर आम आदमी पार्टी के नेता कि हम लोग डरकर गए हैं, तो हम उन्हें बता दें कि हम डरकर नहीं, निराश होकर गए हैं। हम डरकर नहीं बल्कि चिढ़कर आम आदमी पार्टी को छोड़ा है।'




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