Asaduddin Owaisi reaction on demolition drive near Faiz-e-Elahi Masjid in Delhi दिल्ली में तुर्कमान गेट बुलडोजर अभियान को लेकर आई असदुद्दीन औवेसी की प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा?, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली में तुर्कमान गेट बुलडोजर अभियान को लेकर आई असदुद्दीन औवेसी की प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा?

AIMIM सांसद ने कहा, 'जब कोर्ट का आदेश आ गया तो कोर्ट के आदेश के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड को रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, नतीजतन कोर्ट ने गलत फैसला लिया।'

Wed, 7 Jan 2026 06:05 PMSourabh Jain एएनआई, छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र
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दिल्ली में तुर्कमान गेट बुलडोजर अभियान को लेकर आई असदुद्दीन औवेसी की प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा?

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली में तुर्कमान गेट और फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान की निंदा की है और कहा है कि इस कार्रवाई की वजह से वक्फ की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। इस अभियान को लेकर ANI से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘सच तो यह है कि वह पूरी जायदाद ही वक्फ की है और इस बारे में 1970 का वक्फ गजेट भी मौजूद है, जिसकी एंट्री नंबर 40 में इसका जिक्र है।’

'वक्फ को पार्टी ही नहीं बनाया गया'

उन्होंने कहा कि 'इस बारे में 12 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया था। हैरानी की बात यह है कि याचिकाकर्ता, सेव इंडिया फाउंडेशन, जिसका RSS से संबंध है, कोर्ट गया था। जिसके बाद कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया, इसमें MCD, DDA, LDO, रेवेन्यू डिपार्टमेंट और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया, लेकिन इसमें वक्फ को पार्टी नहीं बनाया गया और कोर्ट ने इसका फैसला कर दिया। जबकि कोर्ट को ये चाहिए था कि इसका फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल करता, लेकिन ये मामला ट्रिब्यूनल में नहीं गया।'

'वक्फ बोर्ड को रिव्यू पिटीशन दायर करना चाहिए'

उन्होंने आगे कहा, 'दिल्ली वक्फ बोर्ड को इस मामले में पार्टी बनना चाहिए था और 1970 के वक्फ गजट नोटिफिकेशन का जिक्र करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और जब कोर्ट का आदेश आ गया तो कोर्ट के आदेश के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड को रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, नतीजतन कोर्ट ने गलत फैसला लिया।'

'PWA को दरकिनार कर दिया गया'

ओवैसी ने कहा कि 'अहम बात यह है कि 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के अनुसार 1947 में यह जगह एक मस्जिद थी। ऐसे में उन लोगों ने संसद में पास हुए इस कानून का साफ तौर पर कोई सम्मान नहीं किया। वक्फ की जायदाद को नुकसान हुआ है। जो हुआ है वह सरासर गलत हुआ है। अब दिल्ली वक्फ बोर्ड और उसकी मैनेजिंग कमेटी को तत्काल सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए और सभी तथ्य बताकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश लेना चाहिए।'

बता दें कि MCD (दिल्ली नगर निगम) ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद, बुधवार 7 जनवरी, 2026 की सुबह-सुबह शहर की फैज़-ए-इलाही मस्जिद, तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान के पास एक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था। इस ड्राइव के दौरान पुलिस को स्थानीय लोगों के विरोध के हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा। लगभग 25-30 लोगों ने पुलिस और MCD अधिकारियों पर पत्थर फेंके, जिसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें वहां से खदेड़ते हुए अतिक्रमण हटाया।

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इस बारे में जानकारी देते हुए DCP (सेंट्रल) निधिन वलसन ने बताया कि इस घटना में पांच पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हुए और उन्हें पास के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि अमन कमेटी सहित स्थानीय लोगों के साथ पहले ही बैठक की गई थी, लेकिन कुछ शरारती तत्वों ने शांति भंग करने की कोशिश की।

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