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अमित शाह के पंजाब दौरे पर ही हो गया था फैसला, राघव और उनकी टीम के BJP में जाने की पूरी कहानी

आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट की बीज 2014 में अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान ही बोए जा चुके थे। शुक्रवार को जो कुछ अचानक हुआ लग रहा था, उसे एक लंबी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से हुई थी।

Sat, 25 April 2026 01:57 PMSubodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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अमित शाह के पंजाब दौरे पर ही हो गया था फैसला, राघव और उनकी टीम के BJP में जाने की पूरी कहानी

आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट की बीज 2014 में अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान ही बोए जा चुके थे। शुक्रवार को जो कुछ अचानक हुआ लग रहा था, उसे एक लंबी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से हुई थी।

पिछले साल ही तैयार कर ली गई थी जमीन

आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का नाटकीय ढंग से बाहर निकलना भले ही एक ही दिन में हुआ हो, लेकिन इसकी जमीन पिछले साल ही तैयार कर ली गई थी। शुक्रवार को जो कुछ अचानक हुआ लग रहा था, अब एचटी के सूत्रों के मुताबिक उसे एक लंबी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। इसकी जड़ें पंजाब से जुड़ी हैं। सबसे अहम बात यह है कि इसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से हुई थी।

इस वजह से ये दलबदल हुए

एचटी को पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी के नाराज सांसदों को पार्टी में शामिल करने का फैसला लगभग उसी समय लिया था, जब अमित शाह 14 मार्च को मोगा में एक रैली के लिए पंजाब दौरे पर थे। इस 'बदलाव रैली' को अब उन घटनाओं के क्रम में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है, जिनकी वजह से ये दलबदल हुए।

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नेताओं के बीच असंतोष पनपने लगा

इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, मौजूदा संकट की जड़ें 2024 में तलाशी जा सकती हैं। उस समय दो समानांतर घटनाक्रमों ने स्थिति को आकार देना शुरू किया। दिल्ली चुनावों की तैयारियां तेज हो गईं और पार्टी की पंजाब सरकार के कामकाज को लेकर आप के कुछ नेताओं के बीच असंतोष पनपने लगा। हालांकि, इस महीने की शुरुआत में दरारें साफ नजर आने लगीं, जब 2 अप्रैल को पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में अपने उपनेता के पद से हटाने का फैसला किया।

पाला बदलने वालों में खुद मित्तल भी शामिल

अशोक मित्तल को विकल्प के तौर पर लाया गया था, लेकिन इस फेरबदल से पार्टी को कोई खास मदद नहीं मिली। शुक्रवार को पाला बदलने वालों में खुद मित्तल भी शामिल थे। हालांकि बीजेपी ने पार्टी प्रमुख नितिन नवीन की मौजूदगी में चड्ढा को संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कर लिया। लेकिन, यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या इस कदम से पंजाब में पार्टी को चुनावी फायदा मिल पाएगा।

पंजाब से आ रही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से लगता है कि बीजेपी की रणनीति शायद उतनी कामयाब न हो। राज्य के एक कांग्रेस सांसद ने कहा कि पंजाब के वोटरों की बात ही कुछ और है। उन्हें ‘गद्दार’ पसंद नहीं हैं। मुझे लगता है कि इसका फायदा आप को मिल सकता है।

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मान ने राजनीतिक महत्व को खारिज किया

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी जोरदार पलटवार करते हुए पार्टी छोड़कर जाने वालों के राजनीतिक महत्व को सिरे से खारिज कर दिया। मान ने कहा कि अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया- ये 7 चीजें मिलकर ही किसी सब्जी का स्वाद बेहतरीन बनाती हैं, लेकिन अकेले दम पर इनमें से कोई भी सब्जी नहीं बन सकता।

अपने दम पर सरपंच भी नहीं बन सकते

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मान ने कहा कि वह यह साफ कर देना चाहते हैं कि इनमें से कोई भी अपनी काबिलियत के दम पर एक गांव का सरपंच भी नहीं बन सकता। मान ने कहा कि पार्टी किसी भी व्यक्ति से बड़ी होती है। पार्टी छोड़ने वाले ये 7 लोग पूरे पंजाब का प्रतिनिधित्व नहीं करते। वे कोई जननेता नहीं थे। पंजाब के सीएम ने बीजेपी पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि बीजेपी के पास राजनीतिक जमीन की कमी ने उसे ऐसी चालों की ओर धकेल दिया है।

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पंजाब में बीजेपी को बार-बार नकारा गया

उन्होंने कहा कि यहां कोई आधार न होने के कारण यह केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके हमारी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। पंजाब में बीजेपी को बार-बार नकारा गया है। इसके जवाब में उसने राज्य और आप, दोनों के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया है। वह डरा-धमकाकर, प्रलोभन देकर और दलबदल कराने की कोशिशों के जरिए एक भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है

इस बीच, पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इस टूट को स्वाभाविक बताया। कहा कि पार्टी की कोई विचारधारा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि आप की नींव रेत और पीआर स्टंट पर रखी गई थी। राघव चड्ढा जैसे एक बड़े चेहरे का पार्टी छोड़ना यह साबित करता है कि अंदरूनी खेमे का भी केजरीवाल के विजन से भरोसा उठ गया है।

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