AAP का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब हुआ, बांसुरी स्वराज ने सौरभ भारद्वाज पर निशाना साधा
दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी को निर्देश दिया कि वह बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक वीडियो हटा दे। ये वीडियो एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी हिरासत से जुड़े थे। स्वराज ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इस घटना ने पार्टी का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब कर दिया है।

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी को निर्देश दिया कि वह बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक वीडियो हटा दे। ये वीडियो पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी हिरासत से जुड़े थे। स्वराज ने इस फैसले का स्वागत किया और आप नेता सौरभ भारद्वाज पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पार्टी का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब कर दिया है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बांसुरी स्वराज ने कहा कि मैं अदालत के फैसले का स्वागत करती हूं। आम आदमी पार्टी का महिला विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने रक्षा खडसे और मेरे बारे में झूठ फैलाया था। इसके लिए मैंने उन्हें एक कानूनी नोटिस भेजा था। उसके बाद उन्होंने उस वीडियो को बढ़ावा देने और उसका प्रचार करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
विरोध मार्च के पोस्ट से जुड़ा है विवाद
यह विवाद 19 अप्रैल को बीजेपी के विरोध मार्च के दौरान पोस्ट किए गए एक वीडियो से जुड़ा है। इसमें स्वराज के अनुसार, हिरासत के दौरान उनके व्यवहार को गलत तरीके से दिखाया गया था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में गलत तरीके से यह संकेत दिया गया था कि यह घटना पहले से रची हुई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे को गलती से पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया था, जिससे एक भ्रामक कहानी बन गई। भारतीय ड्रामा कंपनी कैप्शन वाले इस वीडियो को कथित तौर पर पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा भी खूब प्रचारित किया गया था।
वीडियो को जानबूझकर एडिट किया गया
अपनी याचिका में बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि वीडियो को जानबूझकर एडिट किया गया था। इसमें कैप्शन, ओवरले और कमेंट्री जोड़कर उनका मजाक उड़ाया गया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो को दोबारा शेयर किए जाने और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर चर्चा होने के बाद इसकी पहुंच और भी ज्यादा बढ़ गई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाना चाहिए
साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज गुरविंदर पाल सिंह द्वारा जारी अदालत के निर्देशों के अनुसार, 19 अप्रैल का वीडियो और 21 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई उससे जुड़ी टिप्पणियों को एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यू ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाना चाहिए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस आदेश के दायरे में एमसीडी में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग भी आते हैं।
किसी भी प्लेटफॉर्म पर शेयर न करें
कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि अगर 48 घंटे के अंदर आदेश का पालन नहीं होता है तो स्वराज कंटेंट को हटाने के लिए सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र होंगी। कोर्ट ने कहा कि स्वराज ने पहली नजर में एक मजबूत केस पेश किया है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी समेत सभी प्रतिवादियों को आदेश दिया कि वे किसी भी प्लेटफॉर्म पर विवादित कंटेंट को पब्लिश, रीपोस्ट या शेयर न करें।
अगली सुनवाई 13 मई को
कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है। इसे बोलने की आजादी के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि आर्थिक मुआवजा किसी की प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकता। इसलिए, इस मामले में अस्थायी सुरक्षा देना उचित था। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को करेगा।




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