Why Walked Away From Mamata Banerjee Led TMC Close MP Satabdi Roy breaks silence says Didi Badal Gayi Thi ममता बनर्जी से क्यों की बगावत? करीबी MP ने तोड़ी चुप्पी; आरोपों की बौछार, बोलीं- दीदी तक पहुंच हो गई थी मुश्किल, India News in Hindi - Hindustan
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ममता बनर्जी से क्यों की बगावत? करीबी MP ने तोड़ी चुप्पी; आरोपों की बौछार, बोलीं- दीदी तक पहुंच हो गई थी मुश्किल

बागी सांसदों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बगावत करने वाले लोकसभा सदस्यों ने तत्काल तृणमूल कांग्रेस से से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करेंगे।

Tue, 9 June 2026 04:27 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ममता बनर्जी से क्यों की बगावत? करीबी MP ने तोड़ी चुप्पी; आरोपों की बौछार, बोलीं- दीदी तक पहुंच हो गई थी मुश्किल

पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर मचे सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से दूरी बनाने वाले सांसदों ने एक-एक कर अपनी चुप्पी तोड़नी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अभिनेत्री से नेता बनीं और चार बार की सांसद रहीं शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में पार्टी सुप्रीमो यानी ममता बनर्जी तक पहुंच मुश्किल हो गई थी। रॉय ने यह भी आरोप लगाया है कि दीदी पहले से काफी बदल चुकी हैं। शताब्दी रॉय की नाराजगी तब सामने आई है, जब उनसे पहले TMC के दो बागी सांसदों ने सोमवार (8 जून) को ममता बनर्जी पर निशाना साध चुके हैं।

सोमवार को राज्यसभा और TMC से इस्तीफा देने वाले सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने भी TMC नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की थी। उनके बाद काकोली घोष दस्तीदार ने भी नाराजगी जाहिर की थी और दो टूक कहा था कि वो ममता बनर्जी की ममता पर संसद नहीं पहुंची हैं। सोमवार को उन्होंने कहा था कि भले सिर कट जाए लेकिन वो झुकेगा नहीं। अब इस कड़ी में शताब्दी रॉय तीसरी ऐसी नेता बन गई हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी की खुलकर आलोचना की है। रॉय ने दीदी के कामकाज करने के तरीके की भी आलोचना की है।

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'दीदी बदल गई हैं'

2009 से ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी रहीं शताब्दी रॉय ने कहा कि तृणमूल प्रमुख हाल के सालों में काफी बदल गई हैं। उन्होंने NDTV से कहा, "दीदी बदल गई हैं।" उन्होंने आगे कहा, "पिछले कुछ सालों में वह काफी बदल गई हैं। मेरा उनसे भावनात्मक जुड़ाव है, लेकिन मेरे लिए काम मायने रखता है, और इसलिए मैंने यह फैसला लिया है।"

‘हमारी बात नहीं सुनी गई’

अपने फैसले के बारे में बताते हुए रॉय ने कहा कि बगावत की एक बड़ी वजह यह थी कि कई नेता पार्टी लीडरशिप तक पहुँच नहीं पाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी द्वारा फैसले लेने में सिर्फ़ कुछ चुनिंदा नेताओं की ही भागीदारी होती थी, जबकि कई अन्य नेताओं को दरकिनार कर दिया जाता था। उन्होंने कहा, "मैं पार्टी छोड़ रही हूँ क्योंकि हमारी बात नहीं सुनी गई। मैं लोगों के लिए काम करना चाहती हूं लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के मंत्री भी अक्सर सांसदों के अनुरोधों को नज़रअंदाज़ करते थे और उन्हें समय नहीं देते थे।

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NDA के समर्थन में 20 सांसद

बता दें कि ममता बनर्जी की पार्टी 1998 में अपनी स्थापना के बाद से विधानसभा और संसद में हुई दोहरी बगावत की वजह से सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही है। तृणमूल के 80 विधायकों में से 58 ने कुछ ही दिन पहले आला कमान की अवहेलना करते हुए पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया है। इसके बाद सोमवार को करीब 20 TMC सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करने का फैसला किया है।

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बागी गुट में शताब्दी रॉय की क्या भूमिका

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि उनकी तरफ से काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे। इनके अलावा शताब्दी रॉय को सदन में डिप्टी लीडर चुना गया है। इस बागी गुट ने सोमवार को ही केंद्रीय मंत्री और बंगाल भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव से उनके दिल्ली आवास पर मुलाकात की थी और NDA को समर्थन देने की पेशकश की थी। इसी बीच, बागी गुट की चीफ़ व्हिप बनाई गईं काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि बागी सांसदों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।