ऋतब्रत बनर्जी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गई ममता बनर्जी की TMC, किस फैसले को चुनौती
टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद ऋतब्रत ने टीएमसी के नाराज विधायकों के एक गुट से समर्थन से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने है दावा पेश किया।

पश्चिम बंगाल में इस वक्त ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के अंदर भूचाल आया हुआ है। पार्टी के विधायकों के बाद अब सांसद भी बागी हो रहे हैं और खबर है कि 20 टीएमसी सांसदों का एक गुट NDA को समर्थन दे सकता है। इस बीच टीएमसी ने बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने यहां विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी है।
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी के वकील शीर्षन्य बनर्जी ने जस्टिस कृष्ण राव की पीठ से इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की है। टीएमसी ने अदालत को बताया कि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा का पहला सत्र आगामी 18 जून से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले इस विवाद का निपटारा होना बेहद जरूरी है।
वहीं जस्टिस कृष्ण राव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया। मामले को कोर्ट की 11 जून को सुनवाई की सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। बता दें कि इस याचिका को टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से दायर किया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीती थीं, जबकि सत्ता से बाहर हुई टीएमसी को सिर्फ 80 सीटें मिली हैं। इसके बाद मुख्य विपक्षी दल होने की वजह से नेता प्रतिपक्ष का पद टीएमसी के पाले में आना था। हालांकि टीएमसी में अंदरूनी कलह की खबरें सामने आने लगीं।
6 मई को टीएमसी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक बनाने की सिफारिश स्पीकर को भेजी। लेकिन ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा सहित कई विधायकों ने दावा किया कि बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ था और जो लिस्ट सौंपी गई है, उसमें कम से कम 14 विधायकों के दस्तखत फर्जी या ब्लॉक लेटर्स में हैं। आरोप लगाए जाने के बाद टीएमसी ने 1 जून को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निष्काषित कर दिया।
इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी पार्टी के कई नाराज विधायकों का समर्थन लेकर विधानसभा पहुंच गए और नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का दावा ठोंक दिया। बता दें कि दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी पार्टी से अलग होकर अपनी सदस्यता बचाए रखने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का साथ होना जरूरी है। बागी गुट को कानूनी वैधता के लिए कम से कम 54 विधायकों की जरूरत थी। हालांकि ऋतब्रत बनर्जी के पास 58 विधायकों का समर्थन था, जिसके बाद स्पीकर रतींद्र बोस ने ऋतब्रत के गुट को मान्यता देते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया। इसके साथ ही जावेद खान, संदीपान साहा और शिउली साहा को डिप्टी एलओपी और अखरुज्जमां को चीफ व्हिप मान लिया गया।




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