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अभिषेक बनर्जी में घमंड, उनके कारण शुभेंदु अधिकारी गए; ममता के भतीजे पर क्यों फायर विधायक

बागी खेमे से जुड़े एक नेता ने कहा, 'हम ममता बनर्जी को अपना नेता स्वीकार करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को स्वीकार नहीं करते।' गौर करने वाली बात यह है कि बागियों ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी की सर्वोच्चता को चुनौती नहीं दी।

Thu, 4 June 2026 10:20 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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अभिषेक बनर्जी में घमंड, उनके कारण शुभेंदु अधिकारी गए; ममता के भतीजे पर क्यों फायर विधायक

अभिषेक बनर्जी यानी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद दूसरे माने जाने वाले नेता थे। 4 मई को नतीजे आने के बाद जनता से लेकर अपनी ही पार्टियों के साथियों की नाराजगी का सबसे ज्यादा सामना उन्हें ही करना पड़ रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि बगावत करने वाले 58 विधायकों ने उन्हें अपने गुट में किसी तरह शामिल करने से भी इनकार कर दिया है। अब इसके पीछे की वजह समझते हैं।

घमंड और अहंकार के आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक टीएमसी विधायक ने जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, उन्होंने कहा था कि 'ताकत का अंहकार' और 'जमकर भाई भतीजावाद' ने पार्टी को 'तबाह' कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाए थे कि आई पैक के साथ मिलकर अभिषेक ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हाशिए पर पहुंचा दिया है।

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पुराने नेताओं को हाशिए पर पहुंचाया

रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के कई नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी का आंख मूंदकर भतीजे से लगाव ने पार्टी में आंतरिक दरार को बढ़ाया है। वेबसाइट से बातचीत में टीएमसी नेता मुकुल रॉय के पार्टी छोड़ने का जिक्र करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी का तेजी से बढ़ना और मुकुल रॉय का साइडलाइन होना एक साथ हुआ। इसके चलते पार्टी के पुराने नेताओं के बीच नाराजगी ने जगह ले ली थी।

शुभेंदु अधिकारी भी रहे नाराज

अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। टीएमसी एक नेता ने कहा कि अधिकारी तब तृणमूल यूथ कांग्रेस के प्रमुख थे और उनका प्रभाव मालदा, मुर्शिदाबाद समेत कई क्षेत्रों में था। उन्होंने दावा किया कि तनाव तब बढ़ गया जब अभिषेक ने पार्टी के अंदर ही एक यूथ ब्रिगेड खड़ी कर दी। इसका अधिकारी पर गहरा असर हुआ था। जब ममता बनर्जी के सामने मुद्दा पहुंचा, तो उन्होंने अधिकारी को हटाकर अभिषेक को यूथ विंग का प्रमुख बना दिया।

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फलता में फेल हुआ मॉडल

टीएमसी का गढ़ मानी जाने वाली फलता सीट पार्टी को शर्मनाक हार के साथ गंवानी पड़ी। यह क्षेत्र अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र में आता है। साथ ही यहां से टीएमसी के बाहुबली नेता कहे जाने वाले जहांगीर खान को अभिषेक का करीबी माना जाता है। दरअसल, जब चुनाव हुए तो मतदान से महज एक दिन पहले ही जहांगीर ने नाम वापस ले लिया। नतीजा यह हुआ कि सीट भाजपा के खाते में गई।

टीएमसी ने इसे जहांगीर का निजी फैसला करार दिया था। नाराजगी इस बात पर भी है कि चुनावी मैदान से नाम वापस लेने के बाद भी जहांगीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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नई टीएमसी में कोई रोल नहीं

पीटीआई भाषा के अनुसार, बागी खेमे से जुड़े एक नेता ने कहा, 'हम ममता बनर्जी को अपना नेता स्वीकार करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को स्वीकार नहीं करते।' गौर करने वाली बात यह है कि बागियों ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी की सर्वोच्चता को चुनौती नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में मान्यता देना जारी रखा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे विधायक दल के कामकाज में उनके भतीजे अभिषेक के अधिकार को अब और स्वीकार नहीं करेंगे।