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अभिषेक बनर्जी को नई TMC ने बोला गेट आउट, ममता के भतीजे पर जमकर भड़के विधायक

विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने पत्र में गुट ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में मान्यता देना जारी रखा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे विधायक दल के कामकाज में उनके भतीजे अभिषेक के अधिकार को अब और स्वीकार नहीं करेंगे।

Thu, 4 June 2026 07:13 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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अभिषेक बनर्जी को नई TMC ने बोला गेट आउट, ममता के भतीजे पर जमकर भड़के विधायक

TMC यानी तृणमूल कांग्रेस के नए गुट ने सांसद अभिषेक बनर्जी से दूरी बनाने का फैसला किया है। खबर है कि नए नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने साफ कर दिया है कि नए गुट में अभिषेक की कोई भूमिका नहीं होगी। खास बात है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक टीएमसी के महासचिव हैं। करीब 60 विधायकों ने ऋतब्रत का समर्थन किया है।

खास बात है कि यह टूट तृणमूल कांग्रेस में ऐसे समय पर हुई है, जब पार्टी 4 मई को हुई चुनावी हार के बाद संगठन स्तर पर टूट का सामना कर रही है। मौजूदा विभाजय ये भी संकेत दे रहा है कि टीएमसी के विधायक गुट और नेतृत्व के बीच खासी दरार पनप चुकी है। वहीं, विधायक और पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं।

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अभिषेक बनर्जी की नो एंट्री

पीटीआई भाषा के अनुसार, बागी खेमे से जुड़े एक नेता ने कहा, 'हम ममता बनर्जी को अपना नेता स्वीकार करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को स्वीकार नहीं करते।' गौर करने वाली बात यह है कि बागियों ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी की सर्वोच्चता को चुनौती नहीं दी।

विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में मान्यता देना जारी रखा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे विधायक दल के कामकाज में उनके भतीजे अभिषेक के अधिकार को अब और स्वीकार नहीं करेंगे।

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टीएमसी ने उठाए सवाल

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के कदम की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि विधानसभा अध्यक्ष को दी गई जानकारी पार्टी के आधिकारिक लेटरहेड के बजाय सादा कागज पर जमा की गई। पार्टी का रुख है कि विधानसभा को इस तरह के किसी भी निर्णय की जानकारी देने का अधिकार केवल पार्टी अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पास ही है।

सिग्नेचर कांड से शुरू हुआ विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष को वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मान्यता देने के लिए भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए। इन आरोपों के कारण इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू कर दी गई।

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रिताब्रता और उनके साथी और निष्कासित विधायक संदीपन साहा के नेतृत्व वाले विद्रोही खेमे ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को 58 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। यह संख्या दल-बदल रोधी कानून के तहत एक अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की सीमा को आसानी से पार कर लेती है। संख्याबल के माध्यम से अपनी वैधता का दावा करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि अब विद्रोही गुट ही विधानसभा में असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है।