ममता बनर्जी के लिए इस बार का चुनाव सबसे मुश्किल क्यों, कैसे 5 साल में बदल गए हालात
कुछ सालों पहले तक आखिर किसने सोचा होगा कि पश्चिम बंगाल में एक दिन भाजपा सरकार बनाने की स्थिति तक आ जाएगी। एग्जिट पोल्स के आंकड़ों को मानें तो भाजपा सरकार बन रही है। हालांकि, सही नतीजों के लिए चार मई का इंतजार करना होगा, लेकिन यह तो स्पष्ट है कि इस बार कड़ी टक्कर है।

Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान चार मई को होगा। सोमवार लगभग दोपहर तक स्थिति साफ हो जाएगी कि बंगाल में अगली सरकार किसकी बनेगी। तमाम एग्जिट पोल्स में भाजपा पहली बार राज्य में सरकार बनाते दिख रही है, लेकिन अतीत में ये पोल्स कई बार गलत भी हुए हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि ये एग्जिट पोल्स भाजपा के निर्देश पर प्रसारित किए गए हैं, ताकि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा सके। दो चरणों में मतदान खत्म होने के बाद से ही कई जगह भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ता ईवीएम की सुरक्षा के लिए आपस में भिड़ते हुए नजर आए। पिछले डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के लिए यह विधानसभा चुनाव सबसे मुश्किल चुनावों में से एक बन गया है। उन्होंने कई वेलफेयर स्कीम्स चलाईं, जिसके जरिए महिलाओं, युवाओं आदि को सीधे आर्थिक फायदा हुआ, लेकिन भाजपा भ्रष्टाचार और टीएमसी के शासन पर सवाल उठाकर कड़ी टक्कर देने तक आ गई। इसके अलावा, घुसपैठियों का जिक्र करके भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ममता सरकार को पूरे चुनावी कैंपेन के दौरान खूब घेरा।
कैसे पांच साल में बदल गए हालात
कुछ सालों पहले तक आखिर किसने सोचा होगा कि पश्चिम बंगाल में एक दिन भाजपा सरकार बनाने की स्थिति तक आ जाएगी। एग्जिट पोल्स के आंकड़ों को मानें तो लगभग सभी पोल्स में उसकी सरकार बन रही है। हालांकि, सही नतीजों के लिए चार मई का इंतजार करना होगा, लेकिन यह तो स्पष्ट है कि इस बार कड़ी टक्कर है। पांच साल से कुछ समय पहले तक तीन विधायकों वाली भाजपा 2021 के चुनाव में 77 सीटों तक पहुंची और फिर अब सरकार बनाने का दावा कर रही है। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगे बढ़कर पार्टी की कमान संभाली और कई दिन बंगाल में रहकर रणनीति तैयार की। पीएम मोदी ने कई रैलियों को संबोधित किया और ममता सरकार पर जमकर हमले किए।
किन वजहों से ममता के लिए इतना टफ हुआ चुनाव
जब 2011 में ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव जीता था, तब उन्होंने तीन दशकों से राज कर रही वामपंथी सरकार को पराजित किया था। बंगाल की जनता को ममता बनर्जी से कई उम्मीदें थीं, जिनमें से कई पूरी हुईं तो कई बाकी रह गईं। दूसरा चुनाव आसानी से जीतने के बाद 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तगड़ी फाइट दी, लेकिन चूंकि इतना बड़ा वोट फीसदी का गैप था कि उसे पूरी तरह से नहीं पाट सकी और 77 सीटों तक ठिठक गई। इस बार ममता के सामने कई चुनौतियां हैं। डेढ़ दशक से सरकार में होने की वजह से ममता सरकार के सामने एंटी इंकंबेसी होने का खतरा मंडरा रहा है। पहले संगठन के स्तर पर मात खाने वाली भाजपा ने पिछले कुछ सालों में हर बूथ पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जोड़ा है और विचारधारा से उन्हें प्रभावित कर वोट हासिल करने की कोशिश की। संगठन और नैरेटिव, दोनों के स्तर पर भाजपा इस बार मजबूत पकड़ बनाए हुए है। महिलाओं का वोट ममता बनर्जी को जमकर पड़ता रहा है, लेकिन महिला सुरक्षा के नाम पर सरकार कई बार घिरी, जिससे उसे आलोचना का सामना करना पड़ा। आरजी कर मेडिकल रेप केस के समय कई दिनों तक डॉक्टरों का आंदोलन चला और भाजपा ने पीड़िता की मां को उम्मीदवार तक बनाया। इसके जरिए भाजपा महिला सुरक्षा के बेहतर न होने का आरोप लगाती रही।
किस राज्य में किसकी सरकार? 🤔
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एसआईआर से किसे फायदा?
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से लाखों नाम कट गए। हालांकि, चुनाव आयोग का दावा है कि ये नाम ऐसे थे, जोकि या तो मृत हो चुके थे या फिर उन्होंने अपना वोट कहीं और बनवा लिया था। लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के चलते बाहर और खासतौर पर उत्तर भारत में रहने वाले बंगाल के लोगों के मन में डर बैठ गया कि अगर वे इस बार मतदान करने नहीं जाएंगे, तो हो सकता हो कि उनका वोट कट जाए। यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य उत्तर भारत के इलाकों में काम करने वाले लोग अपने राज्य लौटे और वोट दिए। इसकी वजह से वोटिंग फीसद भी बढ़ा। वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसआईआर प्रक्रिया से भाजपा को फायदा हो सकता है।




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