Why is the 114 Rafale jet deal being called the Mother of All Defence Deals 114 राफेल विमानों वाला रक्षा सौदा, क्यों कहा जा रहा 'मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स', India News in Hindi - Hindustan
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114 राफेल विमानों वाला रक्षा सौदा, क्यों कहा जा रहा 'मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स'

भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद समेत कुल 3.60 लाख करोड़ के रक्षा सौदे को मंजूरी दे दी है। इसे मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स कहा जा रहा है। इसके तहत 18 विमान सीधे उड़नेकी स्थिति में मिलेंगे। बाकी का निर्माण भारत में ही होगा।

Fri, 13 Feb 2026 07:37 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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114 राफेल विमानों वाला रक्षा सौदा, क्यों कहा जा रहा 'मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स'

पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ाने वाले राफेल विमानों को लेकर भारत ने फ्रांस के साथ ऐतिहासिक डील को मंजूरी दे दी है। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमानों की खरीद क मंजूरी दी गई है। 114 राफेल विमानों के इस सौदे को 'मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील्स' कहा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी को मजबूत करने के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की पूंजीगत खरीद को मंजूरी दी है।

सीधे उड़ने की स्थिति में मिलेंगे 18 विमान

जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत, राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा 18 विमान सीधे 'उड़ान भरने की स्थिति' में आपूर्ति किए जाएंगे और बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जायेगा, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उत्पादन शामिल होगा और यह उत्पादन चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जायेगा।

प्रोजेक्ट पर कितने की लागत

रक्षा मंत्रालय ने खरीद की लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अनुमान है कि यह 2.90 लाख करोड़ रुपये से 3.15 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी। राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक चार दिन पहले मिली। इस सौदे को हालांकि अंतिम रूप देने के लिए औपचारिक अनुबंध इस साल के अंत से पहले होने की संभावना नहीं है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय को अब हथियारों के पैकेज की लागत और बारीक विवरणों को अंतिम रूप देने के लिए दसॉल्ट एविएशन के साथ बातचीत करनी होगी।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) को भी अधिग्रहण कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी देनी होगी। अप्रैल 2019 में, भारतीय वायुसेना ने लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से 114 बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) की खरीद के लिए एक आरएफआई (सूचना के लिए अनुरोध), या प्रारंभिक निविदा जारी की। इसे हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े सैन्य खरीद कार्यक्रमों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इस परियोजना के अन्य दावेदारों में लॉकहीड मार्टिन का एफ-21, बोइंग का एफ/ए-18 और यूरोफाइटर टाइफून शामिल थे।

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वायुसेना में विमानों की कमी

लड़ाकू विमानों की खरीद का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या आधिकारिक तौर पर स्वीकृत 42 की संख्या से घटकर 31 रह गई है। लगभग 13 साल पहले, रक्षा मंत्रालय ने मध्यम बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) के एक बेड़े की खरीद के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी पूरी कर ली थी। हालांकि, यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। भारतीय वायुसेना (IAF) की स्क्वाड्रन संख्या में तेजी से हो रही गिरावट के मद्देनजर, 2015 में मोदी सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए समझौते की घोषणा की थी। भारतीय वायुसेना वर्तमान में इन राफेल विमानों का संचालन करती है।

भारत में ही बनेंगी मिसाइलें

रक्षा मंत्रालय ने कहा, 'रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य पर सेनाओं के विभिन्न प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता स्वीकृति' (AON) प्रदान की। मंत्रालय ने कहा कि एमआरएफए की खरीद से युद्ध की सभी स्थितियों में हवाई वर्चस्व स्थापित करने की क्षमता बढ़ेगी और लंबी दूरी के आक्रामक हमलों के साथ वायुसेना की निवारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ''खरीदी जाने वाली अधिकांश एमआरएफए मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। ये लड़ाकू मिसाइल गहरी मारक क्षमता और अत्यधिक सटीकता के साथ जमीनी हमले की क्षमता को बढ़ाएंगी।'

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मंत्रालय ने कहा कि एएस-एचएपीएस का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही, इलेक्ट्रॉनिक खुफिया, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए किया जायेगा। इसने कहा कि भारतीय नौसेना को चार मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर और पी8आई लम्‍बी दूरी के समुद्री टोही विमान के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत चार मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर के शामिल होने से विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय नौसेना की बिजली उत्पादन आवश्यकताओं में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी। पी8आई विमान के अधिग्रहण से नौसेना की लम्‍बी दूरी की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।