Rafale vs jf17 of Pakistan both fighter jets were in Operation sindoor which one is more powerful पाकिस्तान के JF17 और राफेल में कौन ज्यादा ताकतवर, ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था मुकाबला, India News in Hindi - Hindustan
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पाकिस्तान के JF17 और राफेल में कौन ज्यादा ताकतवर, ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था मुकाबला

आपरेशन सिंदूर के दौरान जब सुखोई-30 विमानों के जरिये भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और बाद में एयरबेस को नष्ट किया था तब पाकिस्तान ने JF-17 विमानों का इस्तेमाल किया। राफेल ने उन्हें मुहतोड़ जवाब दिया। अब जानते हैं कौन सा विमान है ज्यादा ताकतवर।

Fri, 13 Feb 2026 06:05 AMNisarg Dixit हिन्दुस्तान टीम
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पाकिस्तान के JF17 और राफेल में कौन ज्यादा ताकतवर, ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था मुकाबला

भारत सरकार ने फ्रांस से 114 लड़ाकू विमानों की खरीद का फैसला बेहद सोच-समझकर लिया है। इसके कई फायदे हैं। राफेल फाइटर पाकिस्तान के चीन की मदद से निर्मित JF-17 थंडर विमानों की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हैं। राफेल सौदे को हरी झंडी देने से पहले भारत ने फ्रांस की कंपनी सेफ्रान से इंजन की तकनीक हासिल करने का करार पक्का कर लिया।

इतना नहीं राफेल न सिर्फ देश में बनेंगे बल्कि दसाल्ट एविएशन भारत को विमानों का सोर्स कोड भी उपलब्ध कराने को तैयार है, जिससे भारतीय हथियार प्रणाली को उनमें फिट किया जा सकता है। इससे हथियारों के मामले में भी किसी देश पर निर्भरता नहीं रहेगी। आपरेशन सिंदूर के दौरान जब सुखोई-30 विमानों के जरिये भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और बाद में एयरबेस को नष्ट किया था तब पाकिस्तान ने JF-17 विमानों का इस्तेमाल किया। राफेल ने उन्हें मुहतोड़ जवाब दिया। कई JF-17 नष्ट हुए। हालांकि इस संघर्ष में राफेल के नष्ट होने की पुष्टि आज तक नहीं हुई।

JF17 बनाम राफेल

विशेषज्ञों के अनुसार, JF-17 सिंगल इंजन का चौथी पीढ़ी का विमान है। जबकि राफेल उससे कहीं आगे 4.5 पीढ़ी का दो इंजन वाला विमान है। राफेल की विमानन प्रणाली, हथियार प्रणाली, रडार सिस्टम और समग्र युद्धक क्षमताएं JF-17 से कहीं बेहतर हैं। गति करीब-करीब बराबर है। अलबत्ता, सिंगल इंजन का होने के कारण JF-17 कहीं ज्यादा ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। दूसरे, उसकी कीमत राफेल की एक तिहाई है। इसलिए किफायती है।

रक्षा विशेषज्ञ एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी ने कहा कि राफेल की खरीद का फैसला अच्छा कदम है। असल में राफेल और पांचवी पीढ़ी के विमान में दो ही फर्क है। एक गति का दूसरा स्टील्थ फीचर का। चूंकि भारत की चुनौती चीन-पाकिस्तान हैं, इसलिए बहुत ज्यादा गति भारत को नहीं चाहिए। स्टील्थ क्षमता वाले विमान रडार की पकड़ में नहीं आते। यह भी तब जरूरी होता है जब दुश्मन देश की सीमा दूर हो। सही मायने में इन दो फीचर की जरूरत भारत को नहीं है क्योंकि सीमाएं एकदम पास हैं।

राफेल विमान ही क्यों ?

-वायुसेना पहले से इस्तेमाल कर रही है तथा इसकी परफारमेंस से संतुष्ट है।

-वायुसेना के बेड़े में मौजूदा समय में कई किस्म के विमान हैं, जिससे संचालन संबंधी चुनौतियां आ रही हैं इसलिए पहले से मौजूद राफेल विमानों के बेड़े को बढ़ाने का फैसला लिया।

-एक जैसे विमान होने से पायलटों के प्रशिक्षण और रखरखाव का खर्च भी कम होगा।

-फ्रांस ने भारत को एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (AMCA) के निर्माण के लिए सेफ्रान इंजन बनाने की तकनीक का सौ फीसदी ट्रांसफर करने का भरोसा दिया है। डीआरडीओ से समझौता हो चुका है।

-फ्रांस 96 विमान भारत में बनाने को तैयार है। इससे भारतीय उद्योग की लड़ाकू विमान निर्माण बनाने की क्षमता बढ़ेगी।

-भारतीय हथियारों के लिए सोर्स कोड दे रहा है, भारत अपने हथियार इस्तेमाल करेगा, इससे कीमत भी कम होगी।

सुखोई-57 क्यों नहीं खरीदा

-सुखोई-57 हालांकि 5वीं पीढ़ी का है लेकिन इसकी परफारमेंट को लेकर भारत को कुछ पता नहीं।

-सुखोई विमानों का रखरखाव चुनौतीपूर्ण है जबकि राफेल की मेंटेनेंस न्यूनतम है।

-एक कारण यह है कि युद्ध के चलते रूस तत्काल सुखोई की आपूर्ति करने या उनके भारत में निर्माण में सक्षम नहीं है। जबकि भारत वायुसेना के लिए विमानों की खरीद में और देरी नहीं करना चाहता था।