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मेरे पीछे लोगों की भीड़ है…, सच साबित हुआ विजय का डायलॉग; तब मिली तालियां, मिले अब वोट

टीवीके ने सोमवार को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस जीत के साथ ही विजय और टीवीके के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो गई हैं, और पार्टी के संस्थापक विजय अल्पसंख्यक समुदाय से राज्य की बागडोर संभालने वाले पहले व्यक्ति होंगे।

Tue, 5 May 2026 10:52 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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मेरे पीछे लोगों की भीड़ है…, सच साबित हुआ विजय का डायलॉग; तब मिली तालियां, मिले अब वोट

मेरे दिल में ईमानदारी और हिम्मत है। इससे भी ऊपर, मेरे पास ऐसी भीड़ है, जो मेरे लिए जान देने को भी तैयार है। सोलह साल पहले, सिल्वर स्क्रीन पर गूंजते इन एक्टर जोसेफ विजय के इन शब्दों ने तालियां बटोरी थीं। लेकिन आज वही शब्द तमिलनाडु की मिट्टी में एक नई इबारत लिख रहे हैं। डॉयलॉग का उस समय मजा लेने वालों को शायद क्या पता था कि बॉक्स ऑफिस का यह सुल्तान, एक दिन बैलेट बॉक्स का भविष्य बदलने की तैयारी कर रहा है। जहां राजनीति के दिग्गजों को जमीन तलाशने में दशक लग गए, वहां विजय ने पहली ही दहाड़ से मजबूत सियासी किलों को हिला दिया है। पर्दे का भ्रम खत्म हो चुका है; अब विजय का असली खेल शुरू हुआ है।

बात 27 अक्तूबर, 2024 की है। टीवीके के इतिहास में यह दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। उस दिन विजय ने कहा था, 'मैं उन लोगों का कर्ज कैसे चुकाऊंगा, जिन लोगों ने अपना जीवन मेरे नाम कर दिया है।' दरअसल, इसी दिन राजनेता के तौर पर विजय ने पहली बार राजनेता के तौर पर भाषण दिया था।

राजनीति में एंट्री की फिल्मी कहानी

तमिलनाडु की सियासी धरती पर तूफान लाने वाली TVK यानी तमिलगा वेत्तरी कझगम तो 2024 में अस्तित्व में आई है, लेकिन इसके संस्थापक विजय ने भूमिका 2009 में ही लिखना शुरू कर दी थी। तब विजय ने अपना झंडा लॉन्च किया था, जिसका नारा उन्नल मुदियम था। हिंदी में इसका मतलब होता है 'तुम कर सकते हो'। अब कहा जाता है कि इस ऐलान से ही संकेत मिलने लगे थे कि विजय की कहानी सिर्फ फिल्मी पर्दे पर नहीं, बल्कि सियासी बैनरों और माइक लगे मंचों तक जाने वाली है। ऐसा हुआ भी।

क्या CM जयललिता से ठन गई थी?

विजय की सियासी एंट्री के तार 2013 से भी जुड़ते हैं। दरअसल, उस समय विजय की फिल्म थलाइवा रिलीज हुई थी, जिसकी टैगलाइन थी 'टाइम टू लीड' या 'अब नेतृत्व करने का समय आ गया।' कहा जाता है कि इस फिल्म की रिलीज के समय थियेटर मालिकों को धमकी भरे पत्र मिले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अटकलें थीं कि मुख्यमंत्री जे जयललिता इस टैगलाइन से नाखुश थीं।

कहा यह भी जाता है कि विजय और राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच भी खटपट हो गई थी, जो उनके राजनीति में आने की बड़ी वजह बनी। कथित तौर पर तल्खी इस बात पर थी कि विजय की फिल्मों का डिस्ट्रिब्यूशन स्टालिन परिवार देखेगा और फीस भी वही तय करेगा।

परिवार ने ही मान लिया था थलापति

साल 1994, फिल्म 'रसिगन'। महज 19 साल की उम्र में विजय के परिवार ने उन्हें 'इलैया थलापति' के रूप में पेश कर एक बड़ा दांव खेला था, जो उनकी ब्रांडिंग और गजब के आत्मविश्वास को दिखाता है। अगले एक दशक में वे पर्दे पर निर्विवाद 'थलापति' (कमांडर) बनकर छा गए। लेकिन आज, 51 साल के चंद्रशेखर जोसेफ विजय ने उस फिल्मी उपमा को धरातल पर सच कर दिखाया है। वे 'कमांडर' की छवि से आगे बढ़कर खुद को जनता के 'थलाइवन' (नेता) और 'मुधलवन' (मुख्यमंत्री) के रूप में स्थापित कर चुके हैं।

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जब साइकिल लेकर वोट डालने पहुंचे

साल 2021 के विधानसभा चुनाव के समय वोटिंग शुरू हुई और विजय साइकिल पर वोट डालने के लिए निकल गए थे। अब जब विजय रोड पर निकले, तो प्रशंसकों का सैलाब उमड़ा और हालात काबू में लाने के लिए पुलिस हरकत में आई। खबरें थीं कि विजय ने तत्कालीन AIADMK सरकार में पेट्रोल की कीमतों के विरोध में ऐसा किया था, लेकिन उनके पब्लिसिस्ट ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया। हालांकि, उनकी साइकिल पर क्लिक हुईं उन तस्वीरों ने भविष्य के राजनेता के संकेत दे दिए थे।

खुद विजय भी कर रहे थे इशारे

न्यूज मिनट से बातचीत में विजय की को स्टार रहीं संगीता कृष शूटिंग के दौरान हुए एक वाकये को याद करती हैं। वह बताती है कि किसी ने विजय से राजनीति में जाने वाली अफवाहों को लेकर सवाल किया था, जिसके जवाब में एक्टर ने कहा था, 'कोशिश करने में हर्ज ही क्या है।'

विजय 2014 में प्रदर्शित 'कत्थी' में जब किसानों के सामने पेश आने वाली चुनौतियों पर बात करते दिखे, तो उनके प्रशंसकों के लिए यह एक मसीहा के आगमन जैसा था। जैसे-जैसे विजय की लोकप्रियता बढ़ती गई, उनकी फिल्मों में एक गहरा राजनीतिक संदेश झलकने लगा।

थलाइवा की रिलीज से दो साल पहले वह दिल्ली में अन्ना हजारे के अनशन स्थल पर पहुंचे थे और उनके प्रति समर्थन जताया था, जिससे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। बहरहाल, थलाइवा उम्मीदों के अनुसार अपनी टैगलाइन के कारण विवादों में घिर गई और तमिलनाडु में फिल्म की रिलीज दो हफ्ते के लिए टाल दी गई। यह फिल्म सिनेमाघरों का मुंह तभी देख पाई, जब इसकी टैगलाइन हटाई गई।

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फिल्मों से संकेत

साल 2018 में प्रदर्शित विजय की 'सरकार' ने चुनावी राजनीति और धोखाधड़ी पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे अभिनेता की सियासी भविष्य के बारे में अटकलें और तेज हो गईं। उसी साल थूथुकुडी में पुलिस गोलीबारी से जुड़ी घटना के बाद, विजय ने पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने की पेशकश की।

पीटीआई भाषा के अनुसार, एटली के निर्देशन में बनी विजय की 'मर्सल' (2017) ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर (GST) की आलोचना करने वाली फिल्म के एक संवाद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।

जीत ने पहले ही चौंका दिया था

जब विजय मक्कल इयक्कम (VMI) के बैनर तले एकजुट प्रशंसकों ने 2021 के चुनावों में विजय की तस्वीरों से जीत का परचम लहराया, तो पूरी सियासी दुनिया दंग रह गई। उस धमाके ने अभिनेता के राजनीतिक पदार्पण की ऐसी नींव रखी कि हलचल मच गई। आज वही VMI के सिपहसालार विजय की TVK में अहम ओहदों पर काबिज हैं।

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चुनावी नतीजे

टीवीके ने सोमवार को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस जीत के साथ ही विजय और टीवीके के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो गई हैं, और पार्टी के संस्थापक विजय अल्पसंख्यक समुदाय (ईसाई धर्म) से राज्य की बागडोर संभालने वाले पहले व्यक्ति होंगे।

विजय ने पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। उनकी पार्टी 107 सीटें जीत कर 234 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। टीवीके समर्थकों को उम्मीद है कि कांग्रेस (5), आईयूएमएल (2), वामपंथी दल (4), वीसीके (2) और पीएमके (5) भी समर्थन देंगे और सत्ता में हिस्सेदारी पा सकेंगे। इन सभी पार्टियों ने मिलकर कुल 18 सीटों पर जीत हासिल की है या आगे चल रही हैं। टीवीके को सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है।