किसके डर से भारत ने लौटाई रूस की गैस? बीच समंदर में फंसा पुतिन का जहाज! बड़ा संकट मडराया
ईरान युद्ध से भारत में भयंकर ऊर्जा संकट! पीएम मोदी ने की 'वर्क फ्रॉम होम' की अपील। तेल कंपनियों को हो रहा भारी घाटा, जानें कितने दिन का बचा है देश का ईंधन भंडार और भारत ने क्यों ठुकराई रूसी LNG गैस।
गैस की भारी कमी के बावजूद, भारत ने रूस से वह तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG खरीदने से मना कर दिया है जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। भारत के इस फैसले के कारण भारत आ रहा एक रूसी टैंकर अब बीच समंदर में ही फंसा हुआ है। रूस के जिस पोर्टोवाया प्लांट से यह गैस आ रही थी, उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। मध्य अप्रैल में कुनपेंग नाम का एक विशाल टैंकर गुजरात के दाहेज टर्मिनल के लिए निकला था। कागजों में इसे गैर-रूसी बताया गया था, लेकिन सैटेलाइट ट्रैकिंग में इसकी असलियत सामने आ गई। अब यह टैंकर बिना किसी तय मंजिल के सिंगापुर के पास समंदर में खड़ा है। 30 अप्रैल को रूस के उप-ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन भारत आए थे। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली गैस नहीं खरीदेगा। जून में इस मुद्दे पर आगे की बातचीत हो सकती है।
भारत ने खूब खरीदा रूसी तेल, लेकिन अब...
पिछले कुछ सालों में भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल खूब खरीदा था। लेकिन 2026 की शुरुआत में भारत ने रूस से तेल आयात घटा दिया। इसका एक बड़ा कारण अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करना था। अमेरिका भारत पर दबाव डाल रहा था कि रूसी तेल कम खरीदो। इसलिए जनवरी-फरवरी 2026 में रूस से आयात 44 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। भारत ने खाड़ी देशों और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदना शुरू किया। लेकिन मार्च-अप्रैल में मिडिल-ईस्ट में संकट गहरा गया। ईरान जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया यानी सप्लाई बहुत प्रभावित हुई। यह रास्ता भारत के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल आता है। नतीजा यह हुआ कि खाड़ी से तेल की सप्लाई अचानक घट गई। भारत ने फिर रूस की तरफ रुख किया। मार्च में रूस से आयात लगभग दोगुना होकर 1.98 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। अमेरिका ने कुछ समय के लिए छूट भी दी ताकि पहले से लोड हो चुका रूसी तेल भारत पहुंच सके। अब सवाल उठता है कि भारत अपने गैस संकट के बावजूद रूस की गैस को मना क्यों कर रहा?
भारत ने क्यों किया इनकार?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और आयातक देश है। भारत सरकार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन से बचने के बीच एक बहुत ही नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
कच्चे तेल और LNG में बड़ा अंतर
कच्चे तेल की खेप को बीच समंदर में एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करके आसानी से छिपाया जा सकता है। इसके उलट, सैटेलाइट ट्रैकिंग की वजह से LNG जहाजों की आवाजाही को छिपाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए, प्रतिबंधित LNG खरीदने में कानूनी कार्रवाई और जोखिम का खतरा कहीं ज्यादा है।
कच्चे तेल की खरीदारी अभी भी जारी है
दिलचस्प बात यह है कि भारत अभी भी रूस से बिना किसी रोक-टोक के भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुए 'अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध' के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इस संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने फिलहाल देशों को कुछ अस्थायी छूट दी है, जिसका फायदा उठाते हुए भारत कच्चे तेल का आयात कर रहा है।
ऊर्जा संकट और प्रधानमंत्री की अपील
ईरान विवाद से पहले भारत अपनी गैस की 50% जरूरतें आयात से पूरी करता था, जिसका 60% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता था। कच्चे तेल का भी आधे से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से आता था, जो अब बाधित हो गया है।
इसी संकट को देखते हुए, रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की खास अपील की है। उन्होंने लोगों से 'वर्क फ्रॉम होम' करने, विदेश यात्राएं कम करने और सोने तथा खाद्य तेल का आयात घटाने का आग्रह किया है।
यूरोप और चीन की स्थिति
भारत बिना प्रतिबंध वाली अधिकृत रूसी LNG खरीदने को तैयार है, लेकिन रूस ने उसका ज्यादातर हिस्सा पहले से ही यूरोप को बेच दिया है। दूसरी ओर, चीन अभी भी रूस से प्रतिबंधित और गैर-प्रतिबंधित दोनों तरह की LNG का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। रूस अब भारत के साथ लंबे समय के समझौते करना चाहता है, ताकि वह भारत को LNG के साथ-साथ पोटाश, फास्फोरस और यूरिया जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक बेच सके।
पेट्रोल-डीजल पर तेल कंपनियों के भारी घाटे और देश के ईंधन भंडार पर पेट्रोलियम मंत्री का बयान
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस बीच, भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान और देश में ईंधन के सुरक्षित भंडार को लेकर कई अहम बातें कहीं। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत सरकार को अब इस बात का आकलन करना होगा कि सरकारी तेल कंपनियां आखिर कब तक बाजार मूल्य से कम कीमत पर पेट्रोल-डीजल बेचकर घाटा सह सकती हैं।
कितना हो रहा है नुकसान?
एक सरकारी अधिकारी द्वारा पिछले महीने दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में तेल कंपनियों को डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कीमतें कम क्यों रखी गई हैं?
मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद, भारत सहित कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ने दी हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीद रही हैं, लेकिन देश में उसे सस्ती दरों पर बेच रही हैं।
सरकार नहीं करेगी घाटे की भरपाई
इस भारी नुकसान के बावजूद, सरकार का रुख स्पष्ट है। एक सरकारी अधिकारी ने पहले ही साफ कर दिया था कि तेल विपणन कंपनियों को हो रहे इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
भारत के पास कितना सुरक्षित ईंधन भंडार है?
आम जनता को आश्वस्त करते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश के ऊर्जा भंडार की स्थिति भी स्पष्ट की। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास कच्चा तेल और LNG अगले 60 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है। रसोई गैस (LPG) अगले 45 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।
रूस से LNG आयात पर स्पष्टीकरण
इसी कार्यक्रम में मंत्री ने रूस से गैस खरीदने के मुद्दे पर भी एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा- भारत ने कभी भी रूस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का आयात नहीं किया है। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में रूसी LNG और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा हो रही है।




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