ट्रंप के तेवर, PM मोदी की इशारों में चेतावनी? क्या आने वाला है तेल का महा संकट
गुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा, 'विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।' इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से कुछ समय तक सोना नहीं खरीदने और ईंधन बचाने की अपील कर दी थी। वहीं, इसके बाद सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया कि ईरान के साथ युद्धविराम 'बेहद कमजोर और नाजुक' स्थिति में है। इसके साथ ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्या अमेरिका और ईरान का युद्ध अब तक के सबसे घातक मोड़ पर जा रहा है, जिसके चलते पहले से ही प्रभावित सप्लाई चेन और खराब स्थिति में पहुंच सकती हैं? खबरें ये भी हैं कि ट्रंप ईरान पर बड़ी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा गया है।
पीएम मोदी ने क्या कहा था
पीएम मोदी की तरफ से 7 अपीलें की गईं थीं। उन्होंने कहा था-
- घर से काम को बढ़ावा दें
- एक साल तक सोना न खरीदें
- तेल की बचत करें
- खाने के तेल का इस्तेमाल घटाएं
- प्राकृतिक खेती अपनाएं
- स्वदेशी अपनाएं
- अगले एक साल तक विदेश घूमने जाने का प्रोग्राम न बनाएं
गुजरात में दोहराई बात
गुजरात में भी उन्होंने इन अपीलों को दोहराया था। पीएम मोदी ने कहा था, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।' उन्होंने बताया कि पिछले दशकों में जब भी देश ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया, तो नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।
उन्होंने कहा, 'आज भी हम सभी को एकजुट होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है, जिससे देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।' उन्होंने लोगों से विदेशों में जाकर विवाह करने के चलन 'डेस्टिनेशन वेडिंग' से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपनी अपील को दोहराया और लोगों से इस संकट को देखते हुए सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की, जिसने बड़े पैमाने पर परेशानियां पैदा की हैं।
सीजफायर नहीं हो पाया
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद पहली बार ट्रंप ने 7 अप्रैल को घोषणा की थी कि ईरान के साथ अस्थायी संघर्ष विराम हो गया है। हालांकि, इसके बाद इसे कई बार बढ़ाया गया, लेकिन स्थायी शांति की बात अब तक नहीं हो सकी है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन पहले दौर की बातचीत बेनतीजा निकलने के बाद दोनों मुल्क इस्लामाबाद में एक मंच पर नहीं आ सके हैं।
बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप?
अब खबर है कि ट्रंप ईरान मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मुलाकात करने जा रहे हैं। फिलहाल, ट्रंप सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। एक्सियोस के अनुसार, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इन उपायों में सैन्य कार्रवाई को फिर शुरू करना भी शामिल हो सकता है। इनमें से दो अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ईरान पर दबाव डालने के लिए सैन्य कार्रवाई की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पेंटागन के कुछ अधिकारी ईरान पर दबाव डालने के लिए आक्रामक रवैया अपनाने के पक्ष में हैं। वहीं, कुछ बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालने का समर्थन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि आक्रामक उपायों में ईरान पर हमले शामिल हैं। उनका मानना है कि इसके चलते तेहरान कमजोर हो सकता है।
ट्रंप ने ताजा प्रस्ताव ठुकरा दिया
शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद ईरान के साथ युद्धविराम पर एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, 'यह अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है... उन्होंने जो बकवास हमें भेजा, उसे पढ़ने के बाद... तो यह गंभीर नाजुक स्थिति में है।' ट्रंप ने कहा, 'उन्हें लगता है कि मैं इससे थक जाऊंगा, या ऊब जाऊंगा, या मुझ पर कुछ दबाव आ जाएगा, लेकिन कोई दबाव नहीं है, बिल्कुल भी दबाव नहीं है। हमें पूरी जीत मिलेगी।'
उन्होंने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'मैंने अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' की प्रतिक्रिया पढ़ी है। मुझे यह पसंद नहीं आया, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।' अमेरिका और ईरान स्थायी रूप से एक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
होर्मुज पर सबसे बड़ा असर
युद्ध शुरू होने के बाद एक ओर जहां ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था। वहीं, अस्थायी युद्ध विराम के ऐलान के बाद अमेरिका ने यहां नाकेबंदी कर दी। खास बात है कि दुनिया के कई देशों के लिए तेल आपूर्ति का मुख्य रास्ता होर्मुज ही है। अब दोनों देशों में जारी तनाव का असर भारत समेत अन्य देशों पर भी हो रहा है।
सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि इस जलमार्ग में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।
कितना अहम है होर्मुज
फारस की खाड़ी में तेल निकालने वाले देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को बंद करने से तेल की सप्लाई और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले, इस रास्ते से हर रोज करीब दो करोड़ बैरल तेल दुनिया भर के बाजारों में पहुंचता था, जो अब रुक गया है। दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे।
भारत कच्चे तेल की अपनी कुल जरूरतों का 85 प्रतिशत और एनएनजी की जरूरतों का आधा आयात करता है। इसमें से 40 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 50 से 60 प्रतिशत एलएनजी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते आता है।
भारत के पास कितना तेल
पीटीआई भाषा के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि भारत की ईंधन आपूर्ति में राशनिंग करने यानी कोटा लागू करने की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा, 'घबराने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त आपूर्ति है। राशनिंग जैसा कुछ नहीं हो रहा है और न ही ऐसा होगा।'
मित्तल ने कहा कि सरकार ने अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो हासिल किए हैं और मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाई गई है। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे राजकोषीय उपायों के जरिये कीमतों के झटके को खुद सहा है। उन्होंने बताया कि बाजार में पिछले 67 दिन से जारी व्यवधान के दौरान भारत ने लगभग 60 दिन का ईंधन भंडार और लगभग 45 दिन का एलपीजी भंडार बनाए रखा है।




साइन इन