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मोदी सरकार ने तेल और गैस उत्पादन पर रॉयल्टी में कमी की, इस पहल से क्या बदलेगा?

इन बदलावों से कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद है। भारत इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि स्थानीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके और आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

Tue, 12 May 2026 09:02 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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मोदी सरकार ने तेल और गैस उत्पादन पर रॉयल्टी में कमी की, इस पहल से क्या बदलेगा?

केंद्र सरकार ने क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन पर रॉयल्टी में कमी कर दी है। यह कदम गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्र (अल्ट्रा-डीपवाटर) ब्लॉकों सहित कई कैटेगरी के फिल्ड के लिए उठाया गया है। मोदी सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 8 मई को ये संशोधित दरें लागू कीं।

तेल और गैस कंपनियों की लागत घटाने की कोशिश

इन बदलावों से कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद है। भारत इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि स्थानीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके और आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

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नए फार्मूले के तहत क्रूड और गैस पर रॉयल्टी रेट

संशोधित ढांचे के तहत, ऑनशोर (भूमि पर) क्रूड ऑयल उत्पादन पर प्रभावी रॉयल्टी घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि ऑफशोर यानी समुद्र में क्रूड प्रोडक्शन पर रॉयल्टी घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है। नेचुरल गैस के लिए भी प्रभावी रॉयल्टी दर को घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने रॉयल्टी भुगतान तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाली 'वेल हेड प्राइस' की गणना के लिए एक नया सपाट कटौती फार्मूला पेश किया है।

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नोटिफिकेशन के अनुसार, अब रॉयल्टी की गणना 'वेल हेड प्राइस' पर की जाएगी, जिसमें वेल हेड के बाद की लागतों के लिए एक नियत कटौती की अनुमति दी गई है। यह कटौती नॉमिनेशन रेजीम ब्लॉकों के लिए सेल प्राइस का 20 प्रतिशत और अन्य सभी रेजीमों के लिए 15 प्रतिशत होगी। पहले रॉयल्टी कैलकुलेशन वास्तविक उत्पादन के बाद लागतों से जुड़ी होती थी, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकों के लिए प्रभावी दरें अधिक होती थीं।

गहरे और अति-गहरे समुद्री ब्लॉकों को विशेष रियायतें

सरकार ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों के लिए रियायती रॉयल्टी दरें भी बरकरार रखी हैं। संशोधित ढांचे के तहत, डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) नीति और हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) के तहत ब्लॉकों से क्रूड ऑयल और कंडेनसेट उत्पादन पर गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में पहले सात वर्षों के लिए कोई रॉयल्टी नहीं लगेगी।

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आठवें वर्ष से, गहरे समुद्री ब्लॉकों के लिए रॉयल्टी दर 5 प्रतिशत और अति-गहरे समुद्री ब्लॉकों के लिए 2 प्रतिशत तय की गई है। यही रियायत डीएसएफ और एचईएलपी ब्लॉकों से प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए भी दी गई है, जहां पहले सात वर्षों तक रॉयल्टी दर शून्य रहेगी, उसके बाद यह क्रमशः 5 प्रतिशत और 2 प्रतिशत हो जाएगी।

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